चुनावी मौसम में केंद्र सरकार किसानों की नाराजगी मोल लेने के मूड़ में नहीं है। इसलिए हाल की बारिश और ओलावृष्टि में 50 फीसदी से ज्यादा खराब हुई फसलों की लागत के बराबर मुआवजा देने की तैयारी चल रही है। इस मुद्दे पर बुधवार को कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में मंत्री-समूह (ईजीओएम) की बैठक भी बुलाई गई है।
इस हफ्ते किसानों को राहत पैकेज देने पर केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला कर सकती है। इसके लिए जरूरी हुआ तो चुनाव आयोग की अनुमति भी ली जाएगी। केंद्र से मुआवजा लेने के मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक बाजी मार सकते हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड ने अपने यहां हुए नुकसान की रिपोर्ट अभी तक केंद्र को नहीं भेजी है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में फसलों की बर्बादी का जायजा लेने गई केंद्र की टीमें लौट आई हैं, जबकि कर्नाटक का आकलन होना बाकी है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर कृषि मंत्रालय सप्ताह के आखिर तक राहत पैकेज देने का फैसला कर सकता है। कृषि आयुक्त जेएस संधू ने बताया कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कृषि मंत्रालय की ओर से किसानों की लागत की भरपाई मुआवजे के तौर पर करने का प्रावधान है।
जिन तीन राज्यों में केंद्रीय दलों ने बारिश और ओला वृष्टि से हुए नुकसान का आकलन किया है, वहां जल्द से जल्द लागत की भरपाई करने की कोशिश की जाएगी। इस मामले में सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के मुआवजे की दर अलग-अलग रखी जाती है।
गौरतलब है कि हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश से गेहूं, चना, सरसों और मसूर की फसल खराब हुई है। इन राज्यों ने अपने यहां हुए नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजने में सुस्ती दिखाई है। इसके चलते केंद्रीय दलों ने अभी तक उत्तरी राज्यों में हुए नुकसान का आकलन नहीं किया है। मंगलवार को कृषि सचिव आशीष बहुगुणा ने आला अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति की समीक्षा की है।
बर्बाद फसलों की लागत की भरपाई के अलावा कृषि मंत्री शरद पवार पर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों के लिए किसी बड़े राहत पैकेज का दबाव बढ़ रहा है। इस बारे में अगले एक-दो दिन के भीतर कोई निर्णय लिया जा सकता है। कृषि मंत्रालय किसानों के राहत पैकेज के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेने पर भी विचार कर रहा है।