रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और विदेशी कंपनी निवेश करने जा रही है। अबू धाबी की मुबाडाला इंवेस्टमेंट कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में 9,093.60 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है और यह 1.85 फीसदी की हिस्सेदारी खरीद लेगी। मुबाडला ने जियो प्लेटफॉर्म्स की इक्विटी वैल्यू 4.91 लाख करोड़ रुपये आंकी है।
कंपनी में कुल 87,655.35 करोड़ रुपये का निवेश
यह जियो प्लेटफॉर्म्स में पिछले छह हफ्तों में छठां बड़ा विदेशी निवेश है। जियो प्लेटफॉर्म्स में इन्होंने अब तक कुल 87,655.35 करोड़ रुपये का निवेश किया है। सबसे पहले फेसबुक ने निवेश किया। उसके बाद विश्व के अग्रणी निवेशक सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अंटलांटिक एवं केकेआर ने निवेश किया।
सबसे बड़ा डिजिटल देश बनने की राह पर भारत
जियो में निवेश को लेकर कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ने खुशी जताई है। एक बयान में मुकेश अंबानी ने कहा कि मुबाडाला और जियो के एक साथ काम करने पर दुनिया में भारत निश्चित तौर पर सबसे बड़ा डिजिटल देश बनने की राह पर चल रहा है।
अबू धाबी के साथ मेरे लंबे समय से संबंध- मुकेश अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि, 'मुझे खुशी है कि दुनिया की सबसे बेहतर और परिवर्तनकारी निवेशकों में से एक मुबाडाला ने हमारे साथ पार्टनरशिप का फैसला किया है। वह भारत को डिजिटल राष्ट्र बनाने की हमारी यात्रा का हमसफर बनेंगे। अबू धाबी के साथ मेरे लंबे समय से संबंध हैं और मैनें देखा है कि यूएई की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को दुनिया से जोड़ने और विविधता के रंग भरने में मुबाडाला ने जबरदस्त काम किया है। हम मुबाडाला के अनुभव से लाभान्वित होने के लिए तत्पर हैं।'
मुबाडला इन्वेस्टमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक और समूह के सीईओ खलदून अल मुबारक ने कहा कि, 'हमने देखा है कि कैसे जियो ने भारत में संचार और कनेक्टिविटी को बदल दिया है, और एक निवेशक और भागीदार के रूप में, हम भारत की डिजिटल विकास यात्रा को समर्थन देने लिए प्रतिबद्ध हैं।'
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाएगी कंपनी
खलादून ने कहा कि एक निवेशक और भागीदार के तौर पर हम भारत की डिजिटल विकास यात्रा का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जियो के निवेशकों और भागीदारों के नेटवर्क के साथ हमें विश्वास है कि कंपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाएगी।
मुबाडाला के पोर्टफोलियो में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, धातु और खनन शामिल हैं, दवा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी, रिन्यूएबल एनर्जी एवं युटिलिटीज, एरोस्पेस और विविध वित्तीय होल्डिंग्स का प्रबंधन शामिल है।
हिस्सेदारी बेचने से मार्च 2021 तक रिलांयस पहली कंपनी बन जाएगी जिस पर कोई ऋण नहीं होगा। वहीं बीते मार्च तक रिलायंस कंपनी का कुल ऋण 1.61 लाख करोड़ रुपये था।
जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 'फुली ओन्ड सब्सिडियरी' है। ये एक 'नेक्स्ट जेनरेशन' टेक्नोलॉजी कंपनी है जो भारत को एक डिजिटल सोसायटी बनाने के काम में मदद कर रही है। रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड, जिसके 38 करोड़ 80 लाख ग्राहक हैं, वो जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड की 'होल्ली ओन्ड सब्सिडियरी' बनी रहेगी।