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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज, जो समुद्र से लूट लेता था करोड़ों की मछलियां

Fri, 26 Jun 2020 02:35 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media/Sea Shepherd
आंद्रे डोलगोव या STS-50। हां यही नाम था उसका। कभी-कभी इसे सी ब्रीज-1 नाम से भी पुकारा जाता था। ये वो जहाज था जो महासागरों को लूटता था। आंद्रे डोलगोव जहाज एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा था, जो बहुत संगठित तरीके से काम करता था। ये जहाज करीब 10 साल तक महासागरों से दुर्लभ मछलियां पकड़कर उनकी तस्करी करता रहा। इसे पकड़ने की कई कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि ये जहाज हर बार चकमा देने में सफल हो जाता था। लेकिन एक दिन लुटेरों का ये दल इंडोनेशिया की टास्क फोर्स के हत्थे चढ़ गया। इस जंग लगे, पुराने जहाज को देखकर कोई भी ये नहीं कह सकता था कि ये दुनिया का मोस्ट वांटेड जहाज था।
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मछली पकड़ने वाला जाल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
जिस वक्त इंडोनेशियाई नौसेना के अधिकारी आंद्रे डोलोगोव पर चढ़े तो वहां मछली पकड़ने वाले विशाल जालों का ढेर पड़ा था। ये इतने विशाल जाल थे कि इन्हें 29 किलोमीटर तक फैलाया जा सकता था। इन्हीं की मदद से ये जहाज, एक बार में साठ लाख डॉलर की मछलियां पकड़ लेता था। फिर या तो इनकी कालाबाजारी होती थी। या फिर, इन्हें वैध तरीक़े से पकड़ी गई मछलियों के साथ मिलाकर बेचा जाता था। इन समुद्री लुटेरों के निशाने पर पूर्वी एशिया के मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशियाई द्वीप सुमात्रा के आसपास का समुद्री इलाका होता था। 
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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media/Sea Shepherd
पांच करोड़ डॉलर की मछलियां लूटीं

समुद्री व्यापार के विशेषज्ञ कहते हैं कि समुद्र में पकड़ी जाने वाली कुल मछलियों में से बीस फीसदी अवैध तरीके से पकड़ी जाती हैं। अवैध रूप से मछली पकड़ने की वजह से मछुआरों की रोजी-रोटी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। एक मोटे अनुमान के अनुसार, आंद्रे डोलोगोव ने पिछले दस साल में करीब पांच करोड़ डॉलर की मछलियां समुद्र से लूट ली होंगी। 

ये लुटेरे जहाज अक्सर ऐसे इलाकों में घूमते हैं जो किसी भी देश के अधिकार क्षेत्र के बाहर होते हैं। इसीलिए इन्हें यहां अवैध गतिविधियां करने में आसानी होती है। इस काम में अक्सर सरकारी अधिकारी भी शामिल होते हैं। भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और गुलामी भी इनके काम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन जहाजों पर जो लोग काम करते हैं, उन्हें अक्सर मानव तस्करी के माध्यम से यहां लाया जाता है और फिर जहाज पर ही बंधक बना लिया जाता है। 

यही नहीं अवैध रूप से मछली पकड़ने वाले अक्सर ऐसे औजार इस्तेमाल करते हैं, जो मूंगे की चट्टानों जैसे नाजुक समुद्री इको-सिस्टम के लिए खतरनाक हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन अवैध जहाजों पर लगाम लगाने के लिए काफी प्रयास किया है। 

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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media
1985 में जापान में बना था जहाज

मोस्ट वांटेड जहाज आंद्रे डोलोगोव का असली नाम शिनसेई मारू नंबर-2 था। इसे वर्ष 1985 में जापान में बनाया गया था। वर्षों तक ये जहाज जापानी सी-फूड कंपनी मारूहा निचिरो कॉर्पोरेशन के लिए काम करता रहा। तब जापान सागर और हिंद महासागर में मछलियां पकड़ने का काम करता था। इसके बाद भी आंद्रे डोलोगोव काफी समय दूसरी कंपनियों के लिए मछली पकड़ने का काम करता रहा। 

वर्ष 2008 और 2015 के बीच इस जहाज को अंटार्कटिक समुद्र में टूथफिश पकड़ने के लिए भी तैयार किया गया था। टूथफिश काफी महंगी मछली है। इसे 'सफेद सोना' कहा जाता है। इस मछली को पकड़ने के लिए विशेष लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन आंद्रे डोलोगोव ये काम अवैध रूप से कर रहा था। 
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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media
कब आया नजर में

इसकी अवैध गतिविधियों पर पहली बार अक्तूबर 2016 में चीनी अधिकारियों की नजर पड़ी थी। तब इस जहाज से बड़ी मात्रा में टूथफिश मछली उतारी जा रही थी। इस वक्त आंद्रे डोलोगोव खुद को कंबोडिया में रजिस्टर्ड जहाज के तौर पर पेश करने लगा था। हालांकि, चीन के अधिकारियों के कार्रवाई करने से पहले ही जहाज भाग निकला। 

आंद्रे डोलोगोव इसके बाद भी कई बार कई देशों के शिकंजे में आया, लेकिन हर बार ही ये किसी ना किसी तिकड़म से बच निकलता था। लेकिन इस बार, नाव को अवैध, अनियमित और कहीं रजिस्टर न हुए जहाज के तौर पर नोट कर लिया गया। अब ये वैध रूप से किसी बंदरगाह पर नहीं रुक सकता था।  
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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media
एक जहाज की अनेक पहचान

जनवरी 2017 में इस लुटेरे जहाज ने अपना नाम बदलकर सी-ब्रीज-1 रख लिया और खुद को अफ्रीकी देश टोगो में रजिस्टर बताने लगा। जैसे-जैसे ये जहाज अलग-अलग बंदरगाहों पर जाता, अपना नाम बदलता रहता और जाली दस्तावेज दिखाकर निकल जाता। इस जहाज के चालक दावा पेश करते थे कि उनका जहाज करीब आठ देशों के लिए काम करता है, जिसमें टोगो, नाइजीरिया और लैटिन अमेरिकी देश बोलीविया भी शामिल हैं। 

आखिरकार 2018 में आंद्रे डोलोगोव को मेडागास्कर में एक बंदरगाह पर पकड़ लिया गया, लेकिन इस बार भी जहाज के कप्तान अधिकारियों को चकमा देकर फरार हो गए। हालांकि इस बार ये समुद्री लुटेरे अपने निशान छोड़ गए। इस जहाज में स्वचालित ट्रांसपोंडर लगा था, जिसका इस्तेमाल समुद्र में जहाजों के बीच टकराव रोकने में होता है। इसे AIS के नाम से जाना जाता है। सैटेलाइट की मदद से इसकी लोकेशन का पता लगाना आसान हो जाता है। इंडोनेशिया के अधिकारियों ने आंद्रे डोलोगोव के AIS का ही पीछा किया। कई दिनों की मशक्कत के बाद उसे कब्जे में ले लिया।  
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दुनिया का 'मोस्ट वांटेड' जहाज - फोटो : Social media
मालूम नहीं जहाज का मालिक कौन

इस तरह के अवैध जहाजों का पीछा करना, उन्हें जब्त करना और उनके पूरे नेटवर्क का पता लगाना एक महंगा काम है। अक्सर देश इस काम में दिलचस्पी नहीं लेते। जिस वक्त आंद्रे डोलोगोव जब्त किया गया, वो इंडोनेशिया की समुद्री सीमा में था। इंडोनेशिया ने 2014 में अवैध रूप से मछली पकड़ने वाले 488 जहाज पकड़े थे। इन जहाजों पर जो लोग इंडोनेशियाई नागरिक थे, उन पर भी कड़ी कार्रवाई की गई। 

इस लुटेरे जहाज का असल मालिक कौन है? इसके जाली कागजात कौन तैयार कराता था? इससे कितनी मछली की तस्करी हुई और कहां-कहां पैसे का लेन-देन हुआ? अब इन सवालों के जवाब इंटरपोल की मदद से तलाशे जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मछली पकड़ने का अवैध धंधा बड़े पैमाने पर फैला है। चंद जहाज पकड़ लेने भर से हालात सुधरने वाले नहीं। इसके लिए ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है। इस दिशा में काम भी हो रहा है, जिसमें तकनीक की भी मदद ली जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ये काम आसान होने की उम्मीद है। 
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