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ये है असम के जातिंगा में पक्षियों की आत्महत्या का सच? सुसाइड नहीं, ऐसे मरते हैं पक्षी

Thu, 06 Dec 2018 03:33 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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मशालों और शहरों की रोशनी की ओर जाते परिंदे - फोटो : सोशल मीडिया
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असम अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत के कारण सैलानियों के लिए प्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है। दरअसल, सालों से यहां विभिन्न जातियां इस प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों में आकर बसीं और यहां की मिश्रित संस्कृति में अपना योगदान दिया। इस तरह असम में संस्कृति और सभ्यता की समृद्ध परंपरा और बढ़ गयी।

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असम के बड़े और घने जंगल, चाय के बागान, स्वच्छ निर्मल ब्रह्मपुत्र नदी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।  उत्तर-पूर्व के राज्यों में असम एक ऐसा प्रदेश है जो शांति, संस्कृति और परंपरा जैसी खूबियों से परिपूर्ण है। यह भारत के शानदार टूरिस्ट स्टेट के रूप में भी चर्चित है। यहां का पर्यटन जितना खूबसूरत है वहीं रहस्यमयी और आश्चर्यजनक भी है। 

परिंदे - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, असम में एक ऐसी जगह भी है जहां परिंदे आत्महत्या करते हैं और ये जगह जतिंगा नाम से जानी जाती है। पिछले 100 सालों से प्रत्येक वर्ष असम की छोटी सी जगह जतिंगा में आकर हजारों परिंदे आत्महत्या करते हैं। हालांकि, महज 2500 लोगों की आबादी वाले इस छोटे से शहर में प्रत्येक वर्ष परिंदों की मौत काफी विचित्र होने के साथ-साथ काफी हद तक अस्पष्ट भी है। 

जतिंगा पक्षियों के सुसाइट पॉइंट के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां अब भी कई ऐसे रहस्य हैं, जो लोगों को हैरत में डाल देते हैं। आपको बता दें की, मानसून के बाद अक्सर सितंबर और अक्टूबर के महीनों में पक्षियों की 44 प्रजातियां जतिंगा में आती हैं और शाम 6 से 9 बजे के बीच ये परिंदे बिलकुल व्याकुल हो जाते हैं।

काफी आश्चर्यजनक है कि परिंदे विचलित होकर, मशालों और शहरों की रोशनी की ओर जाते हैं। हालांकि, परिंदों की इस गतिविधि को आत्महत्या का नाम देना गलत है। दरअसल, ये परिंदे प्रत्येक वर्ष अपनी मौत की ओर जाते हैं लेकिन इनकी मौत का कारण जतिंगा के गांववाले हैं जो असल में परिंदों की हत्या करते हैं।
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मृत परिंदे - फोटो : सोशल मीडिया
गांववालों का मानना है कि, ये परिंदे नकारात्मक शक्ति का प्रतीक हैं और हर साल उनका विनाश करने आते हैं। इसी कारण गांव वाले परिंदों को पकड़कर उन्हें बांस के डंडे से तब तक पीटते हैं जब तक परिंदे मर नहीं जाते। मौत के बारे में जानते हुए भी ये परिंदे हर वर्ष खुद ही उड़ते हुए अपनी मौत के पास आते हैं। 
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