यूके (United Kindom) में गर्भवती महिलाएं एक नए अंदाज में बच्चों की डिलीवरी करा रही हैं, या यूं कहें कि इसका चलन चल गया है। यहां महिलाएं बच्चों का पालन-पोषण प्राकृतिक तरीके से करना चाहती हैं। इसलिए वो 'Lotus Birth' का चयन कर रही हैं। नवजात शिशु के जन्म के दौरान, जब उसका गर्भनाल न काटा जाए, तो उसे 'Lotus Birth' कहते हैं।
'Lotus Birth'
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प्रेग्नेंट महिलाओं में 'Lotus Birth' का खासा क्रेज देखा जा रहा है। वहीं डॉक्टर इस नए चलन से काफी चिंतित नजर आ रहे हैं, उनके मुताबिक, ये प्रकिया बिल्कुल सेफ नहीं है। इस तरीके बच्चे में इंफेक्शन फैलने का खतरा बना रहता है।
प्लासेंटा और गर्भनाल को अलग नहीं किया जाता है
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'Lotus Birth’ में प्लासेंटा और गर्भनाल को अलग नहीं किया जाता है। इसे किसी टब, मटके या फिर थैले में बहुत ही साफ-सफाई के साथ रखा जाता है, ताकि इसमें किसी तरह के किटाणु और बदबू न आए। कुछ दिनों में गर्भनाल सूख कर अपने आप ही अलग हो जाती है। लगभग इसमें 10 दिन का समय लग जाता है।
प्राकृतिक तरीका
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डॉक्टर सारा, 'Lotus Birth' को अच्छा बता रही हैं, उनके मुताबिक, 'Lotus Birth' के बाद मां और बच्चे का रिश्ता काफी गहरा हो जाता है और इस तरीके से बच्चा अस्पताल के बेवजह के नियम और कानून से भी दूर रहता है। इसे आप प्राकृतिक तरीका भी कह सकते हैं।