फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांववालों की ऐसी क्रूरता, 15 बच्चों को मगरमच्छ को खिलाया

विज्ञापन
विज्ञापन
आपने साउथ अफ्रीका में रहने वाली कई अजीबोगरीब जनजातियों की किस्से-कहानियां पढ़ीं और सुनी होंगी।
विज्ञापन


लेकिन, वहां के ईथोपिया के ओमो वैली की कहानी सुनेंगे तो यकीनन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

डेली मेल के मुताबिक यहां रहने वाले कारो जनजाति के लोग कुछ बच्चों को जन्म से ही श्रापित मानते हैं।

ऐसे बच्चों का वो जल्द से जल्द सफाया कर देना ही भला समझते हैं। फिर इसमें मां-बाप की रजामंदी मिले न मिले, वो बच्चे को मार कर ही दम लेते हैं।

Trending Videos

मां की कहानी दर्दनाक

आमतौर पर अगर किसी भी वजह से मां का एक भी बच्चा उससे जुदा हो जाता है, तो उसकी जैसे सांसें ही निकल जाती हैं।

सोचिए कारो जनजाति की इस महिला का क्या हाल होता होगा जिसके एक-दो नहीं बल्कि पूरे 15 बच्चों का मार डाला गया।

मारने के पीछे भी कारण ऐसे जिसका कोई न सिर हो न पैर।

इस जनजाति के बड़े-बूढ़े ऐसे बच्चों को खत्म कर देते हैं जो उनके हिसाब से ‌गांव के नियमों के ‌खिलाफ होते हैं, जुड़वा होते हैं या जिनके दांत पर दांत निकले रहते हैं।

बहुत नाइंसाफी है

45 साल की बुको बालगुडा नाम की ये औरत अपनी जाति को इसलिए नहीं पसंद करती क्योंकि उन लोगों ने उसके 15 नवजात बच्चों को श्रापित मानकर उन्हें जंगल में मगरमच्छों को खिला दिया।

बुको का कहना है कि उसके 7 लड़के थे और 8 नन्ही लड़कियां, लेकिन गांववालों ने उन पर कोई नर्मी नहीं दिखाई।

आपको बतांए कि बुको अपने तरह की अकेली महिला नहीं हैं। इस गांव में कई महिलाओं के बच्चों के साथ ऐसा काम किया जा चुका है। श्रापित बच्‍चों को मिंगी कहते हैं।
विज्ञापन

पढ़ाई तो आई

ईथोपिया के इस गांव में लोग कुछ मॉर्डन तो हुए हैं। उनके गांव में शिक्षा को जगह दी गई है, लेकिन अभी भी गांव के फैसले लेने में वो लोग पढ़ाई से कुछ सीखते नजर नहीं आते।

वो करते वही हैं जो उन्हें करना होता है।

गांव वालों का ऐसा मानना है कि अगर श्रापित बच्चों को मार नहीं डाला गया तो उनके गांव में बदकिस्मती आ जाएगी और गांव के सभी लोग मर जाएंगे।

ऐसे ही और अजाबोगरीब किस्से कहानियों को पढ़नें के लिए क्लिक करें

 




और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें