मुंबई में रहने वाली बूढ़ी लखन काले इतनी गरीब है कि उसके पास न तो अपना घर है और न हीं कोई सुरक्षा।
मेट्रो के मुताबिक सालों पहले उनके बेटे की मौत हो चुकी थी। बेटे की मौत के बाद घर में बस उनकी बहू और छोटा सा मानसिक रूप से विक्षिप्त पोता ही बचा था।
दुख की घड़ी में साथ रहने के बजाय लखन की बहू उन्हें छोड़ कर चली गई। अब बूढ़ापे में बचा तो बस वो अकेला पोता जो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता।