फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आखिर गांधीजी को मारने वाले गोडसे की अस्थियां क्यों सुरक्षित रखी हुई हैं आजतक?

Thu, 30 Jan 2020 05:16 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
महात्मा गांधी-नाथूराम गोडसे - फोटो : Social media
आज 30 जनवरी है। 72 साल पहले यानी 1948 में आज ही के दिन भारत के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी की हत्या हुई थी और हत्यारे का नाम था नाथूराम गोडसे। उसने अपनी पिस्टल से एक के बाद एक तीन गोलियां गांधीजी के शरीर में उतार दी थीं। इस घटना के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। सभी के चेहरे पर मायूसी थी। हालांकि उस वक्त तक तक बहुत से लोगों को ये नहीं पता था कि गांधीजी की मौत हो चुकी है। बाद में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने लोगों को बताया था कि गांधीजी अब इस दुनिया में नहीं हैं। 

विज्ञापन

2 of 6
नाथूराम गोडसे - फोटो : Social media
उधर, गांधीजी की हत्या के जुर्म में नाथूराम गोडसे को गिरफ्तार कर लिया गया। उसपर एक साल से भी अधिक समय तक मुकदमा चला। इस दौरान उसने अदालत में अपना जुर्म भी कबूल किया और कहा कि उसी ने गांधीजी को मारा है। अपना पक्ष रखते हुए गोडसे ने अदालत में कहा था, 'गांधीजी ने जो देश की सेवा की है, उसका मैं आदर करता हूं और इसीलिए उनपर गोली चलाने से पहले मैं उनके सम्मान में झुका भी था, लेकिन चूंकि उन्होंने अखंड भारत के दो टुकड़े कराए, इसीलिए मैंने उन्हें गोली मारी।'  
विज्ञापन

3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आखिरकार आठ नवंबर, 1949 को अदालत ने गोडसे को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद 15 नवंबर, 1949 को उसे अंबाला जेल में फांसी दे दी गई। फांसी से पहले गोडसे के एक हाथ में गीता और अखंड भारत का नक्शा था और दूसरे हाथ में भगवा झंडा था। कहा जाता है कि फांसी का फंदा पहनाए जाने से पहले गोडसे ने 'नमस्ते सदा वत्सले' का उच्चारण किया था और साथ ही नारे भी लगाए थे। 

4 of 6
नाथूराम गोडसे की अस्थियां - फोटो : Social media
शायद आप न जानते हों, लेकिन नाथूराम गोडसे की अस्थियां आज तक नदी में प्रवाहित नहीं की गई हैं। वो पुणे के शिवाजी नगर इलाके में स्थित एक इमारत के कमरे में सुरक्षित रखी हुई हैं। उस कमरे में गोडसे के अस्थि कलश के अलावा उसके कुछ कपड़े और हाथ से लिखे नोट्स भी संभालकर रखे गए हैं। 
विज्ञापन

5 of 6
नाथूराम गोडसे - फोटो : Social media
नाथूराम गोडसे की भतीजी हिमानी सावरकर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि फांसी के बाद गोडसे का शव भी उन्हें नहीं दिया गया था बल्कि सरकार ने खुद घग्घर नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। इसके बाद उनकी अस्थियां हमें एक डिब्बे में भरकर दे दी गई थीं। आपको बता दें कि गोडसे की एक अंतिम इच्छा थी और इसीलिए उनके परिवार ने आज तक उनकी अस्थियों को नदी में नहीं बहाया है बल्कि उसे एक चांदी के कलश में सुरक्षित रखा गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
नाथूराम गोडसे की अस्थियां - फोटो : Social media
हिमानी सावरकर के मुताबिक, नाथूराम गोडसे ने अपनी अंतिम इच्छा के तौर पर अपने परिवार वालों से कहा था कि उनकी अस्थियों को तब तक संभाल कर रखा जाए और जब तक कि सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में समाहित न हो जाए और फिर से अखंड भारत का निर्माण न हो जाए। ये सपना पूरा हो जाने के बाद मेरी अस्थियों को सिंधु नदी में प्रवाहित कर दी जाए। यही वजह है कि गोडसे के परिवार ने आज तक उनकी अस्थियों को संभाल कर रखा है और उनके सपने के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें