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महिला ने एलियनों को लेकर किया अजीबोगरीब खुलासा

Fri, 04 Mar 2016 05:11 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला

सार

  • अमेरिका की एक पूर्व एयरफोर्स रडार संचालक ने ऐसा दावा किया है कि सुन कर आपके कान खड़े हो जाएंगे। 
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नियारा - फोटो : daily mail
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विस्तार
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अमेरिका की एक पूर्व एयरफोर्स रडार संचालक ने ऐसा दावा किया है कि सुन कर आपके कान खड़े हो जाएंगे। नियारा टेरेला इसले का कहना है कि रेप्टाइल यानि छिपकली की तरह दिखने वाले आदमियों ने उन्हें चंद्रमा पर ले जाकर बंदी बनाया था और उनके साथ गैंगरेप किया।
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डेलीमेल की खबर के मुताबिक एलियन यूएफओ साइटिंग्स संस्था ने अमेरिका के चंद्रमा पर बने खुफिया अड्डे के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि नियारा उन कुछ लोगों में से हैं जिन्होंने ऐसे रेप्टाइल को देखा है।

इस अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने चांद पर खुफिया अड्डे बनाए हैं, वहां इन्हीं छिपकली जैसे लोगों का राज होता है और इंसानों को तो खिलौनों की तरह रखा जाता है।
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मुझे सेक्स गुलाम की तरह इस्तेमाल किया जाता था

नियारा - फोटो : daily mail
नियारा का मानना है कि 1980 में हुए इन खतरनाक हादसों के बाद उनके दिमाग से सारी यादें मिटा दी गई थीं और उन पर हिपनॉसिस यानि सम्मोहन किया गया था। उन्हें उतना ही याद है जितना हिपनॉसिस में याद आया।


उन्होंने बताया कि सम्मोहित किए जाने के बाद उन्हें याद आया कि कैसे एक छिपकली सा दिखने वाला एलियन उन्हें चंद्रमा पर खुफिया अड्डे पर ले जा रहा था। वे सिर्फ 25 साल की थीं जब उन्हें कुछ महीनों के दौरान 8-9 बार अंतरिक्ष में ले जाया गया था।


उन्होंने बताया,''मुझे बहुत कम खाना दिया जाता था और पूरे दिन काम कराया जाता था। चंद्रमा पर अड्डे को और बड़ा करने के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉनिक औजारों से खुदाई करनी होती थी। बाकी कामों जैसे हड्डियों के ढेर उठाने में शारीरिक मेहनत लगती थी। सबसे बुरा यह था कि रात में मुझे सोने नहीं दिया जाता था और मुझे सेक्स गुलाम की तरह इस्तेमाल किया जाता था। एक एलियन मुझे संबंध बनाने के बाद दूसरे एलियन को दे देता था।

60 साल की नियारा काफी समय से गहरे तनाव से जूझ रही थीं और आखिरकार उन्हें सम्मोहन के जरिए अपने सवालों के जवाब मिले। उनका दावा है कि उन्हें अगवा करने वाले इंसान की एक पूंछ, पीली आंखें और आंखों की पुतलियां ऊपर नीचे थीं। कई सिद्धांतकारों का मानना है कि अमेरिकी सरकार को इन अपहरणों के बारे में पता है। उनका कहना है कि इसीलिए कर्मचारियों की शिकायतों की सही तरह से जांच नहीं हुई
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