सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक फीमेल जेनेटिक म्यूटिलेशन जिसे हम एफएचएम या खतना नाम से भी जानते हैं, साउथ अफ्रीका के कई हिस्सों में काफी आम है।
केन्या के नाइरोबी में ऐसी कई जगहें हैं जहां कुछ औरतें लड़कियों का खतना करती हैं। जिस जगह वो खतना करती हैं हम और आप उस जगह को कटिंग रूम से जानते हैं।
इस काम को अंजाम देने वाली दो औरतों ने बताया कि वो कमरे छोटे-छोटे और एक-दूसरे से सटे होते हैं जहां आठ साल जितनी छोटी लड़कियों को लाया जाता है और उनके प्राइवेट पार्ट को काट दिया जाता है।
ऐसा होता है कटिंग रूम
आप जब इन कमरों में जाएंगे तो वहां जमीन पर पड़ा देखेंगे एक छोटा सा प्लास्टिक बैग जिसपर इन लड़कियों को लेटने को कहा जाता है। उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और उन्हें शोर ना मचाने को कहा जाता है।
उसी जगह पर ब्लेड और शराब भी रखी रहती है। ये महिलांए सबसे पहले दो से तीन कट लगाकर खतना को अंजाम देती हैं। इसके बाद उसपर शराब की बूंदे भी डालती हैं।
वो कहती हैं कि इससे जलन तो बढ़ती है पर कुछ देर बाद खून का बहाव बंद हो जाता है। लड़कियों को खतना कर देने के बाद उसी कमरे में तीन हफ्ते रहना होता है।
और भी है प्रकिया...
इस दौरान लड़कियां चल-फिर नहीं पाती। चलने-फिरने की इजाजत भी नहीं होती। उनके पैरों को कंबल से ढंक दिया जाता है और बाहरी हवा ना लगे, इसका ध्यान भी दिया जाता है।
हर सुबह उनके घाव को खोला जाता है और इथनॉल स्पिरिट डालकर साफ किया जाता है। दो हफ्तों तक ऐसा करने के बाद उन्हें इजाजत मिलती है कि वो चलें। अगर वो ठीक ढंग से चल-फिर पा रही होती हैं तो उन्हें घर जाने की इजाजत दे दी जाती है।
आप जानकर दंग होंगे कि खतना कर देने की एक बड़ी वजह ये महिलाएं लड़कियों की कामुक इच्छाओं को मारना बताती हैं। इनका मानना है कि खतना करने से उनकी कामुक इच्छाएं खत्म हो जाती हैं ।
बैन है खतना फिर भी नहीं मानते लोग
केन्या और ब्रिटेन, दोनों जगह खतना पर बैन है। लेकिन ये महिलाएं बताती हैं कि नायरोबी में ब्रिटेन से भी ऐसे परिवार अपनी बच्चियों का खतना करवाने आते हैं जिनके जड़ साउथ अफ्रीका से हैं।
लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि खतना के दौरान लड़कियों को भयावह रूप से इंफेक्शन होने का खतना रहता है। खतना से ही कितनी लड़कियों का जानें चली भी जाती हैं।