पापुआ न्यू गिनी में स्थानीय बदमाशों को 'रास्कल' कहा जाता है। इन लोगों पर यहाँ बलात्कार के सबसे ज़्यादा आरोप लगे हैं। इन लोगों के लिए किसी महिला का गैंगरेप करना पापुआ न्यू गिनी के गैंग्स की रोज़मर्रा की आम गतिविधियों में शामिल है। इस बारे में ये लोग खुलकर बात भी करते हैं। उन्हें कैमरे और पुलिस का कोई डर नहीं। एक 'रास्कल' ने बीबीसी को बताया, "यहाँ महिलाएं सबसे आसान शिकार हैं। उन्हें लूटना सबसे आसान होता है। उन्हें पीटना आसान है। सड़क पर अगर आप किसी महिला को पीटते हैं तो कोई उसका विरोध नहीं करेगा। ये आम है। इसलिए हमारे लिए ये भी आसान शिकार हैं।"
हर वक़्त डर का साया
पोर्ट मोरेस्बी शहर में आप किसी महिला को ग़ौर से देखेंगे तो उनकी 'चौकन्नी निगाहों' से ये साफ़ पता चल जाता है कि वो निरंतर एक ख़तरे में जी रही हैं। शहर में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की इतनी वारदातें होती हैं कि यहाँ सरकार को 'सेफ़ हाउस' नाम के घर स्थापित करने पड़े हैं।
एक सेफ़ हाउस में हमारी मुलाक़ात सुज़ैन से हुई जो बीते दो महीने से अपने बच्चों के साथ यहाँ रह रही हैं। साल 2000 में उनकी शादी हुई थी। 18 साल तक चली घरेलू हिंसा के बाद सुज़ैन की हिम्मत ने जवाब दे दिया। सुज़ैन ने बताया, "वो मुझे बहुत मारता था। उसने इसी साल फरसे से मेरा हाथ चीर दिया था। हथेली पर मुझे 35 टांके लगवाने पड़े। वो मुझे मारता रहा तो डर के मारे मुझे मकान की दूसरी मंज़िल से कूदना पड़ा। मेरा दाहिना पैर टूट गया था।" सुज़ैन ने बताया कि उनका पति उन्हें अपनी 'संपत्ति' समझता था और उसके घरवाले उसे रोक नहीं पाते थे।
सेफ़ हाउस का कल्चर
मैरिसा ने भी 'सेफ़ हाउस' में शरण मांगी थी। लेकिन नियमों के अनुसार, यहाँ रहने के लिए उनकी उम्र थोड़ी ज़्यादा है। सेफ़ हाउस की मैनेजर ने उन्हें नियमों की मजबूरी समझाई और मैरिसा को वापस लौटना पड़ा।मैरिसाने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मेरा दामाद मुझे बेल्ट से पीटता है। वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता है। मैं ऐसा नहीं होने दे सकती। मुझे घर लौटने में डर लग रहा है। वो चाकू रखता है। मेरी बेटी को भी वो बहुत मारता है।" मैरिसा ने बताया कि उनके दामाद ने अपनी दो बेटियों का भी रेप किया है। लेकिन उनके परिवार को कोई पुलिसिया मदद नहीं मिली।
महज पांच साल पहले ही पापुआ न्यू गिनी में 'फ़ैमिली प्रोटेक्शन ऐक्ट' बनाया गया है। इस ऐक्ट के अनुसार, घरेलू हिंसा एक अपराध है जिसके लिए दो साल जेल की सज़ा हो सकती है या आरोपी को दो हज़ार अमरीकी डॉलर जुर्माना देना पड़ सकता है। इस क़ानून से जैनेट जैसी महिलाओं के हौसले बढ़े हैं जिन्होंने कुछ ही दिनों पहले घरेलू हिंसा के कारण अपना घर छोड़ दिया था। वो बताती हैं, "मुझे अपने छोटे बच्चों को छोड़कर भागना पड़ा। लेकिन मैं पुलिस की मदद लेना चाहती हूं। पापुआ न्यू गिनी में घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ रिपोर्ट करने का कल्चर बहुत कम है। महिलाएं शिक़ायत करने से बचती हैं। लेकिन मैं क़ानून की मदद से अपने बच्चों को वहां से निकालना चाहती हूं।" पापुआ न्यू गिनी का समाज पितृसत्तात्मक समाज है। यहाँ घर के सभी फ़ैसले लेना का अधिकार मर्दों के हाथ में है। लेकिन शादीशुदा मर्दों की इसपर क्या राय है? ये जानने के लिए बीबीसी ने जैनेट के पति के बात की।
उन्होंने बताया, "मैं एक नौकरीपेशा आदमी हूँ। मैं एक स्कूल में पढ़ाता हूँ। मैं हिंसा क्यों करूंगा। जैनेट ने मुझे थप्पड़ मारा था जिसके बाद मैंने हाथ उठाया। मैंने उसके चेहरे पर एक ही मुक्का मारा था।"
जैनेट के पति ने कहा कि उनकी पत्नी का रवैया ठीक नहीं है पर 'ख़राब रवैये' से उनका क्या मतलब है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "वो मेरी बात नहीं सुनती। वो वही करती है जो उसे करना होता है। वो बच्चों को दूध तक नहीं पिला सकती। घर का कोई काम उसे नहीं आता। वो मुझे भड़काता है तभी मैं हिंसा करने को मजबूर होता हूं।" इस बातचीत के कुछ वक़्त बाद जैनेट के पति को गिरफ़्तार कर लिया गया। जैनेट अपने बच्चों से मिलीं और फिर कुछ दिन बाद परिवार के कहने पर उन्होंने अपने पति पर लगाये सभी आरोप वापस ले लिये।
बीबीसी ने पोर्ट मोरेस्बी शहर के बाहरी इलाक़े में स्थित पापुआ न्यू गिनी की सबसे बड़ी बोमाना जेल की भी दौरा किया। यहाँ क़ैद व्यस्कों और नाबालिगों के एक जत्थे से हमने मुलाक़ात की। इनमें 27 में से 12 लड़कों पर रेप का आरोप है। पुलिस के अनुसार, रेप का सबसे युवा अभियुक्त 13 साल का लड़का है।
जेल में 39 वर्षीय क़ैदी रूबेन से हमने बात की, जिनपर 10 साल की एक लड़की का रेप करने का आरोप है। उन्होंने बड़े आराम से पूरी कहानी बताई और कहा कि वो लड़की उनके घर आई थी। वो बोले, "मैं इसे रेप नहीं मानता क्योंकि वो मेरे घर पर आई थी। मैंने किसी हथियार के दम पर उसके यहां जाकर ये सब नहीं किया था।" एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पापुआ न्यू गिनी में रेप की अधिकतम सज़ा पाँच साल जेल है और नाबालिगों के मामले में ये सज़ा अधिकतम दो साल जेल की है और पुलिस ये मानती है कि ये सज़ा रेप जैसे जुर्म के लिए काफ़ी कम है।