आजकल की मॉडर्न महिलाएं काम के सिलसिले में खूब सफ़र करती हैं। चाहे वो ट्रेन का लंबा सफ़र हो या हवाईजहाज़ की छोटी यात्रा, सार्वजनिक टॉयलेट से इन्फ़ेक्शन लगने का ख़तरा महिलाओं को रहता ही है।’
पश्चिमी देशों में पी-बडी जैसी किट आसानी से उपलब्ध होती है। लेकिन भारत में इसे पहली बार लाया गया है और अब पी-बडी कुछ स्टोर्स में और ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
इसे इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का कहना है कि ये प्रॉडक्ट उनके लिए एक राहत बन कर आया है।
मुंबइ में रहने वाली हनी बजाज ने बताया, ‘भारतीय महिलाओं को हर स्थिति में समझौता करने की आदत सी हो गई है।
तो हम गंदे टॉयलेट को मजबूरी में इस्तेमाल तो करती हैं लेकिन जुगाड़ू तरीके से। हम वेस्टर्न टॉयलेट में हवा में ही थोड़ा झुक कर ही ख़ुद को हल्का कर लेती हैं।
पी-बडी के आने से अब वो दिक्कत तो दूर हो ही गई है, औऱ साथ ही अब मुझे किसी बीमारी या इन्फ़ेक्शन का भी कोई डर नहीं है।’
महिलाओं को बड़ी राहत
वहीं पी-बडी यूज़र ज़ीना चतवाल ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं एक सेल्स महिला हूं और मेरी रोज़ की सबसे बड़ी समस्या यही है कि मैं पेशाब करने कहां जाऊं।
मैं हमेशा अपने पुरुष दोस्तों से कहती थी कि मुझे उनसे जलन महसूस होती है क्योंकि उनकी ज़िंदगी में ये दिक्कत नहीं है. लेकिन अब मैं भी उनकी तरह ख़ुद को हल्का कर सकती हूं।’
यानि खड़े होकर पेशाब करने की आज़ादी अब सिर्फ़ पुरुषों के पास ही नहीं बल्कि महिलाओं के पास भी है। लेकिन हां, फ़र्क इतना है कि कुछ पुरुष शौचालयों के बजाय दीवारों को अपना शिकार बनाते हैं।
भारत का अजब ही नजारा
भारत में दीवारों और पेड़ों पर पुरुषों को पेशाब करते देखना एक आम नज़ारा है। स्थिति कितनी ही दबाव भरी हो, लेकिन महिलाओं के पास ये विकल्प नहीं होता।
कभी तो सार्वजनिक टॉयलेट ढूंढने की जद्दो-जहद और अगर टॉयलेट मिल भी जाए तो वो इस्तेमाल करने की हालत में नहीं होते।
ऐसे में महिलाओं के पास दो विकल्प बचते हैं – या तो वे ख़ुद को घंटों तक कंट्रोल करें और या फिर ऐसे शौचालयों का इस्तेमाल करें और संक्रमण का ख़तरा लें।
टॉयलेट सीट से बचाव
लेकिन अब महिलाओं के पास तीसरा विकल्प उपलब्ध है – पी-बडी।
ये एक ऐसी किट है जिसका इस्तेमाल कर महिलाएं खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं।
इस किट को पहली बार भारत में बनाने वाले बिज़नेसमैन दीप बजाज ने बताया, ‘ये एक नली जैसी किट है जिसका इस्तेमाल कर महिलाएं खड़े होकर पेशाब कर सकती हैं।
इसके इस्तेमाल के बाद महिलाएं इसे फेंक सकती हैं। यानि उन्हें गंदी टॉयलेट सीट पर बैठने की ज़रूरत नहीं है।’
इन्फ़ेक्शन का ख़तरा
भारत में गंदे टॉयलेट इस्तेमाल करने के कारण हज़ारों महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन यानि यूटीआई होता है।
लेकिन पी-बडी केवल इस इन्फ़ेक्शन का ही समाधान नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उन महिलाओं के लिए भी उपयोगी है जो आर्थराइटिस यानि जोड़ों में दर्द की वजह से पेशाब करने के लिए झुक नहीं पातीं।
दीप बजाज का कहना था, ‘केवल सार्वजनिक शौचालय ही नहीं, कभी-कभी रेस्त्रां के टॉयलेट भी गंदे पाए जाते हैं।