गया वो जमाना जब औरतें पीरियड्स को लेकर काफी चुप रहती थी। अब औरतों ने इसपर बात करना शुरू किया है और मर्दों से भी इस बात पर खुलकर बोलना शुरू किया है।
लेकिन फिर भी बड़े हद तक अगर देखा जाए तो पीरियड्स हमारे समाज में एक टैबू की तरह ही देखा जाता है और उसके बारे में ज्यादातर लोग बात करने में सहज महसूस नहीं करते।
कुछ ऐसी भी औरतें हैं जिनका ये सोचना है कि पीरियड्स महिलाओं के साथ होने वाली एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है और इससे समाज में हिचकने की कोई जरूरत नहीं।