गुजरात और पुरी में निकलने वाली रथयात्रा दुनिया भर में मशहूर है। इसी तरह भारत का एक और अन्य खूबसूरत राज्य मेघालय है, जहां हर साल रथयात्रा निकाली जाती है लेकिन उस त्योहार का एक अलग नाम है, जिसे 'बेहदीनक्लाम' कहते हैं। मेघालय के शिलॉन्ग के जैन्तिया जिले में इस त्योहार को मनाया जाता है। यह अनूठा त्योहार बुआई के मौसम के खत्म होने के बाद आयोजित किया जाता है, ताकि प्रकृति की किसी भी विनाशकारी ताकतों को दूर किया जा सके।
सबसे रंगीन धार्मिक त्योहार होने के अलावा, यह जैन्तिया के लोगों का सबसे महत्वपूर्ण और अद्वितीय नृत्य त्योहार भी है। यह समारोह और अनुष्ठान तीन दिनों तक चलता है और अंतिम दिन, दोपहर में लोग एट्नार नामक एक जगह में इकट्ठे होते हैं और युवा और बूढ़े नृत्य करते हैं। यह त्योहार एक अच्छी फसल के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए भगवान को एक आमंत्रण है। इस दिन महिलाएं पूर्वजों की आत्माओं के लिए प्राथर्ना भी करती हैं और भोज का आयोजन भी होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भविष्यवाणी की गई थी कि री-पन्नर (पन्नर की भूमि) में व्यापक महामारी फैलेगी। इससे डरते हुए, जौई लोग अपने संरक्षक देवताओं मुलोंग, मुरलॉन्ग यू मुखाई और मुस्नियांग के मंदिर की यात्रा करते थे। कहते हैं, सपने में उन देवताओं ने ही लोगों को बेहदीनक्लाम के त्योहार के रूप में दिव्य तत्वों की पूजा करने की सलाह दी, जो सालाना आयोजित की जाती है।