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पिता की दरिंदगी, बच्ची के रोने से था परेशान, ले ली जान!

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छोटे बच्चे को पालना कोई आसान काम नहीं है। उनको ठीक से रखने के लिए उन पर ध्यान देना होता है और उन्हें खुश रखना होता है।
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लेकिन, इंग्लेंड के ईस्ट सुसेक्स में रहने वाले इस पिता का इन सब चीजों से जैसे कोई मतलब ही नहीं था।

डेली मेल के मुताबिक वो 28 साल का मार्क सैंडलैंड अपनी गोद भर की बच्ची के साथ घर में अकेला था।

हो गया बिजी

वैसे ही मार्क टीवी पर प्लेस्टेशन जैसे गेम्स खेलने का आदी था। घर में बच्ची के साथ अकेले रहने पर बच्ची की केयर करने के बजाय वो उस दिन भी गेम्स खेलने में ही मशगूल था।

वो गेम में बिजी ही था कि थोड़ी ही देर बाद उसकी बेटी ने रोना शुरू कर दिया। बच्ची को चुप कराने और सुलाने के बजाय उसने बच्ची को आधे घंटे तक रोने दिया।

इसके बाद भी बच्‍ची ने रोना बंद नहीं किया। उसके रोने से मार्क को बहुत गुस्सा आ रहा था। वो चाहता था कि उसकी बेटी गेम्स में रोड़ा ना बने। इसलिए उसने उठाया भयानक कदम।

गुस्से में मार डाला

बच्ची का रोना मार्क के बर्दाश्त के बाहर जा चुका था। उसने अपनी पांच हफ्तों की बच्ची को उठाया और गुस्से में जोर से हिलाया।

इतने बुरे झटके से बच्ची को सदमा सा लगा और वो बेहोश हो गई। उस वक्त जब ये घटना घटी तो बच्ची की मां अपनी सोशल सांइस डिग्री कोर्स की पहली क्लास अटेंड करने गई थी।

जब मार्क की लड़की बेहोश हो गई तो उसने अपनी पत्नी फोन करके बताया कि उसे मिर्गी का दौरा पड़ गया था जिस वजह से वो बच्ची के ऊपर जा गिरा और जब उसे होश आया तब तक वो बेहोश हो गई थी।
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पहुंची एमरजेंसी

ऐसा सुनते ही मार्क की पत्नी ने फौरन एमरजेंसी सर्विस को घर भेजा और बच्ची को अस्पताज पहुंचाया।

चार दिनों तक जिंदगी-मौत से लड़ने के बाद आखिरकार बच्ची की जान चली ही गई।

इसके बाद कोर्ट केस बना जहां जांचकर्ताओं को पता चला कि मार्क ने जानबूझकर टीवी बंद कर दिया था ताकि किसी को टीवी पर गेम खेलने के चक्कर में बेटी की जान लेना का पता ना चले।

उसने अपनी मिर्गी के दौरे का हवाला तो दिया लेकिन जांच में सब साफ हो गया। फिलहाल फैसले के लिए मामले को ऊपरी कोर्ट में भेज ‌दिया गया है।

फेसबुक की लत ने ये क्या करवा डाला?


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