साउथ अफ्रीकी गांवों में ऐसे कई जनजातियां रहती हैं जो अपनी किसी ना किसी खासियतों से हम आम इंसानों को हैरत में डाल सकती हैं।
डेली मेल के मुताबिक साउथ अफ्रीका के केन्या के गांवों में 300 लोगों की एल मोलो जनजाति रहती है।
तेज धूप और दुनिया से दूर रहने वाले इन लोगों की जीवनशैली किसी को भी अचंभित कर सकती है।
आपको बता दें की एल मोलो केन्या की सबसे छोटी जनजाति है और सबसे बहादुर भी। ऐसा किस लिए पढ़िए आगे।
ये है पसंदीदा खाना
हर बेल्ट के लोगों का कोई ना कोई स्थाई खाना होता है जिसे बगैर वो अपना दिन गुजारना पसंद नहीं करते।
आपको जानकर अचंभित महसूस होगा कि ये लोग मगरमच्छ और दरियाई घोड़े को पकड़कर खाते हैं। यही खाना इन्हें पसंद है।
एल मोलो जनजाति के लोग लेक तुर्काना नाम की झील के किनारे रहते हैं। इस झील का पानी बहुत ही नमकीन होता है।
खारा होने के बावजूद वो इसे पी लेते हैं।
हम ज्यादा बहादुर
300 लोगों के होने के बावजूद इन जनजाति के लोगों में दो गांव बंटे हुए हैं।
जो भी गांव ज्यादा मात्रा में मगरमच्छ और दरियाई घोड़े मारकर खाता है, वो श्रेष्ठ माना जाता है।
ये लोग झोपड़पट्टी के ऊपर लगने वाली घास से अपने लिए कपड़े बनाते हैं।
ये भी बात ध्यान देने कि है कि घास से बनाए गए स्कर्ट और वन पीस ड्रेस वाकई लाजवाब होती हैं।
सरकार की चिंता
साउथ अफ्रीकी सरकार को अपने इस अनोखे जनजाति के होने पर गर्व है। लेकिन, हर साल तकरीबन 100000 मगरमच्छों की मौत और दरियाई घोड़े की जान लेने के पक्ष में वो नहीं हैं।
इसलिए सरकार ने अब एल मोलो पर प्रतिबंध लगाते हुए उन्हें लेक से मछलियां पकड़कर खाने को कहा है।
हांलाकि अब ये लोग कम से कम मगरमच्छों और दरियाई घोड़े को अपना शिकार बनाते हैं, लेकिन फिर भी इसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है।
पहुंचा पानी
इन लोगों की खारे पानी पर निर्भरता देखकर सरकार ने इन लोगों तक साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है।
एल मोलो जनजाति के लोग वैसे तो ऐनिमेस्ट होते हैं। यानि के वो लोग जो मानते हैं कि अजीवित चीजों में भी आतमांए बसती हैं।
अब का बदलता दौर देखें तो इस बीच इस ट्राइब के कई लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन किया है और ईसाई धर्म को अपनाने लगे हैं।
उम्र कर देगी हैरान
मगरमच्छ और दरियाई घोड़े खाने वाले ये लोग की औसत उम्र 40 होती है। ये लोग 45 की उम्र से ज्यादा नहीं जी पाते हैं।
इसके लिए इनका खान-पान और कड़ी जीवनशैली वजह बताई जाती है।
माना जाता है कि इनके बदन में कई जरूरी तत्व कम मात्रा में होते हैं जिससे उनकी मौत जल्दी होती है।