वायरल वीडियो में महिला बताती है कि विमान की अंतिम पंक्ति में बैठने की सबसे बड़ी समस्या सीट का सीमित या बिल्कुल न झुक पाना है। पीछे दीवार होने के कारण सीट पीछे नहीं जाती। इस कारण शरीर को आराम नहीं मिल पाता है। लंबे समय तक सीध बैठने से पीठ, गर्दन और कमर में दर्द बढ़ सकता है। खासकर 3 से 5 घंटे की फ्लाइट में यह समस्या काफी ज्यादा परेशान करती है। इस दौरान नींद लेना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
दूसरी बड़ी परेशानी टॉयलेट और गैले के पास होने से जुड़ी है। इस हिस्से में लगातार आवाजाही बनी रहती है। यात्री लाइन में खड़े रहते हैं, जिससे शोर और हलचल परेशान करती है। कई बार बदबू और फ्लश की आवाज भी यात्रा का पूरा अनुभव खराब कर देती है।
तीसरा अहम कारण टर्बुलेंस का ज्यादा असर है। विमान का पिछला हिस्सा पंखों से दूर होता है, इसलिए हिलने-डुलने का प्रभाव यहां अधिक महसूस होता है। जिन लोगों को मोशन सिकनेस होती है, उनके लिए यह सीट और भी मुश्किल बन सकती है। इसके अलावा इस हिस्से में बैठने वालों को खाना-पीना सबसे अंत में मिलता है और पसंदीदा विकल्प खत्म होने की संभावना रहती है।
अगर आप यात्रा का अच्छा अनुभव चाहते हैं, तो सीट का चयन ध्यान से करना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि विंग्स के आसपास की सीटें अधिक स्थिर होती हैं। अगर बार-बार उठना हो तो आइल सीट बेहतर रहती है। फ्रंट और मिड सेक्शन को अधिक आरामदायक माना जाता है। बजट होने पर एक्स्ट्रा लेगरूम सीट चुनना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।