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हिमाचल की इस झील में छिपा है अरबों का खजाना, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

Fri, 23 Jul 2021 06:17 PM IST
Shashi Shashi फीचर डेस्क, अमर उजाला
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कमरुनाग झील - फोटो : amar ujala
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भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़ो की खूबसूरती देखकर यहां आने वाले लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहां की खूबसूरत वादियों का नजारा लेने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। हिमाचल प्रदेश न केवल अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के जाना जाता है बल्कि यहां की कई जगहों का पौराणिक महत्व भी माना जाता है। यहां पर बहुत सी ऐसी जगह हैं जिनका अपना प्राचीन इतिहास है। कुछ जगहों का संबंध महाभारत काल से भी माना जाता है। अपने आप में रहस्यों को समेटे हुई इन जगहों में से एक जगह ऐसी भी है जहां अरबों का खजाना छिपा हुआ है। हिमाचल प्रदेश में हम किसी भूखंड की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि यहां पर एक ऐसी झील है जिसमें अरबों का खजाना है लेकिन इतना खजाना होने पर न ही तो अभी तक इसे निकालने का प्रयास किया जाता है और न ही यहां कोई सुरक्षा के प्रबंध हैं। आइए जानते हैं यहां कैसे आया ये खजाना और इसे क्यों नहीं निकाला जाता है।

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कहां पर है खजाना
हिमाचल प्रदेश की प्रमुख झीलों में से कमरुनाग झील यहां मंडी तीसरी प्रमुख झील है। यह झील मंडी से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर रोहांडा के घने जंगलों में स्थित है। इस झील का नाम घाटी यहां के के देवता कमरुनाग के नाम पर पड़ा है। इसी झील में अरबों का खजाना होने की बात कही जाती है। हालांकि, अब तक किसी ने झील की गहराइयों से खजाना निकालने का प्रयास नहीं किया है।

कहां से आया यहां इतना खजाना
दरअसल यहां पर झील के पास ही एक मंदिर है। इसे बाबा कमरुनाग का मंदिर कहा जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि प्रतिवर्ष 14-15 जून को बाबा कमरुनाग पूरी दुनिया में दर्शन देते हैं। इस खास मौके पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस झील में खजाना होने का कारण बहुत ही हैरान कर देने वाला है। दरअसल लोग शमनोकामना पूर्ति होने के बाद यहां पर झील में रुपए, पैसे हीरे-जवाहरात चढ़ाते हैं। महिलाएं सोने चांदी के जेवर इस झील को अर्पित कर देती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है इसलिए इस झील में अरबों का खजाना होने की बात कही जाती है।
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भेंट चढ़ाने का होता है निश्चित समय
झील में अपने आराध्य के नाम से भेंट चढ़ाने का भी एक निश्चित समय होता है। जब यहां के मुख्य देव यानी कमरुनाग बाबा कलेबा अर्थात भोग लगता है, तब ही झील में भेंट डाली जाती है। यहां पर इतना खजाना होने के बाद भी कोई सुरक्षा के लिए नहीं लगा होता है। लोगों की आस्था है कि कमरुनाग देव इस खजाने की रक्षा करते हैं। 
 
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