कानपूर का एक मंदिर "भ्रष्ट तंत्र विनाशक शनि मंदिर"। जिसे बनवाया है, पवन राणे वाल्मीकि ने। मंदिर निजी भूमि पर है जहां साधारण लोगों को आने की अनुमति है। लेकिन यहां वर्तमान व पूर्व IAS / PCS अधिकारीयों, जज, मजिस्ट्रेट, पूर्व व वर्तमान विधायक/सांसद एवं मंत्रियों का आना वर्जित है। अब सवाल उठता है ऐसा क्यो? तो चलिए जानते हैं इस बारे में..
कानपूर मंदिर
बाहर बोर्ड पर बड़े-बड़े शब्दों में लिखा है कि 'मंदिर में देश के भ्रष्ट जनप्रतिनिधि और भ्रष्ट नौकरशाहों का प्रवेश वर्जित है' अन्दर शनि भगवान के सामने देश के सभी भ्रष्ट मंत्रियो और नेताओं की तस्वीरें लगाई गईं हैं। सभी भक्तों की शनि देव से यही प्रार्थना होती है कि भ्रष्ट लोगों पर जल्द ही अपनी नजरें टेढ़ी करें और इनको सद्बुद्धि दें। मंदिर में शनि देव के साथ हनुमान जी एवं ब्रह्मा जी की मूर्तियाँ हैं।
कानपूर मंदिर
इस मंदिर की विशेषता यह है कि मंदिर के बीचों-बीच शनि देव की तीन मूर्तिया एक दूसरे की तरफ पीठ कर के लगी हैं। इस तरह एक शनि देव की दृष्टि पूरी संसद, राज्य सभा और वर्तमान नेताओं की फोटोज पर पड़ती है, फिर वो चाहे मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी ही क्यों ना हों या फिर मौजूदा समय देश के प्रधानमंत्री 'नरेंद्र मोदी'।
इसी तरह दुसरे शनि देव की दृष्टि , सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और न्यायाधीशों की तस्वीरों पर पड़ रही है। और तीसरी मूर्ति की दृष्टि के बारे में जान कर आपको आश्चर्य होगा की शनि देव की पूर्ण द्रष्टि “ब्रह्मा जी" पर भी पड़ रही है कारण यह कि उन्हीं के द्वारा इस तरह की श्रष्टि की रचना की गयी है जिसमें इतने भ्रष्ट लोग पैदा हो गए। यानी अब ब्रह्मा जी भी संभल जाएं और भ्रष्ट लोगों को ना पैदा करें।
कानपूर मंदिर
यहां प्रसाद चढ़ाना और फूल तोड़ कर अर्पित करना मना है। सिर्फ लौंग, काली मिर्च और इलायांची चढ़ाया जा सकता है। लाऊड स्पीकर, घंटा व शोर करना मना है। मिट्टी के दीये में सरसों तेल जलाया जा सकता है। शराब व तम्बाकू का सेवन करने वालों को भी अन्दर जाने की इज़ाज़त नहीं है।
मजेदार बात तो यह है कि इस मंदिर में अब लोगों की आस्था भी बढ़ने लगी है और जो लोग अपने को हर तरफ से निराश और हताश पाते हैं वो यहां आ कर शनि देव से न्याय के लिए अर्जी लगाते हैं। देश का कोई भी शख्स अगर भ्रस्टाचार चार से पीड़ित है तो उसे जरूर कानपुर के इस भ्रष्ट तंत्र विनाशक मंदिर में जरुर आना चाहिए।