ज्वालामुखी सोये हुए दानव की तरह होते हैं। कभी-कभी ही जागते हैं और जब जागते हैं तो आसपास के लोगों पर कहर बरपा कर फिर शांत हो जाते हैं।
दुनिया में कई ऐसे ज्वालामुखी हैं। सिर्फ लातिन अमरीका में ही ऐसे दर्जनों सक्रिय ज्वालामुखी हैं, लेकिन इन में से कुछ बहुत ही खतरनाक हैं।
ये ज्वालामुखी या तो समय-समय पर भड़कते रहते हैं या फिर इनकी विनाशकारी क्षमता इन्हें खतरनाक श्रेणी में रखती है।
ग्वाटेमाला में हुआ ज्वालामुखी विस्फोट इसका ताजा उदाहरण है। इस घटना में 75 से लोगों की मौत हुई है और 200 से ज्यादा लोग लापता है।
इस ज्वालामुखी विस्फोट से करीब 17 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। तो चलिए जानते हैं दुनिया के दस खतरनाक ज्वालामुखी के बारे में...
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पोपोकटेपेटल, मैक्सिको
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पोपोकटेपेटल, मैक्सिको
- फोटो : BBC
यह ज्वालामुखी 5,452 मीटर ऊंचा है और अत्यधिक सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यही कारण है कि इसकी मॉनिटरिंग लगातार की जाती है।
यह मैक्सिको सिटी से दक्षिणपूर्व में करीब 70 किलोमीटर दूर है। अगर यह विस्फोट हुआ तो करीब 2.5 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।
साल 1994 के बाद यह सक्रिय हो गया है। इससे राख और लावा निकलते रहते हैं।
साल 2016 में राखों का धुंध तीन किलोमीटर तक ऊपर उठा था, जिसके बाद प्यूएबला राज्य में अलर्ट जारी किया गया था
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कोलिमा ज्वालामुखी, मैक्सिको
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कोलिमा ज्वालामुखी, मैक्सिको
- फोटो : BBC
यह माना जाता है कि यह मैक्सिको का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है। हाल के सालों में यह समय-समय पर राख और धुआ छोड़ता रहा है।
इसकी ऊंचाई 3280 मीटर है और जलिस्को और कोलिमा की सीमा पर स्थित है। 2015 और 2016 में इसके राखों के फव्वारे की वजह आसपास के इलाके खाली करा दिए गए थे।
तुरीआल्बा ज्वालामुखी, कोस्टा रिका
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तुरीआल्बा ज्वालामुखी, कोस्टा रिका
- फोटो : BBC
कोस्टा रिका के बीचों बीच ये ज्वालामुखी स्थित है। यह कैलिफोर्निया के सैन जोस शहर के करीब 60 किलोमीटर दूर है। सितंबर 2016 में इससे भयानक विस्फोट हुआ था, जिसके बाद आसपास के शहरों पर राख के बादल छा गए थे।
ये विस्फोट इस ज्वालामुखी का कई दशकों में सबसे बड़ा विस्फोट माना जाता है। तब से इस ज्वालामुखी से धुआं, राख और गरम पदार्थों का उत्सर्जन होता रहा है।
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ग्लैरस, कोलंबिया
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ग्लैरस, कोलंबिया
- फोटो : BBC
यह कोलंबिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। यह नरिनो में स्थित है।
1993 में हुए हल्के विस्फोट में वैज्ञानिकों के एक समूह और पर्यटकों की मौत हो गई थी। ये सभी ज्वालामुखी के क्रेटर के अंदर थे।
बीते सालों में इसमें छोटे-मोटे विस्फोट होते रहे हैं और राख, धुआं निकलते रहे हैं।
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नेवादो देल रुइज. कोलंबिया
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नेवादो देल रुइज. कोलंबिया
- फोटो : BBC
ये कोलंबिया का दूसरा सक्रिय ज्वालामुखी है। कोलंबिया के वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये लगातार सक्रिय रहता है और राख उत्सर्जित करता रहता है।
यह 5,364 मीटर ऊंचा है और देश के कॉफी क्षेत्र में स्थित है।
साल 1985 में हुए विस्फोटों की वजह से 25 हजार से अधिक लोग मारे गए थे। ये इतिहास का सबसे भयानक विस्फोट था।
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कोटोपाक्सी, इक्वाडोर
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कोटोपाक्सी, इक्वाडोर
- फोटो : BBC
कोटोपाक्सी 5,897 मीटर ऊंचा ज्वालामुखी है जो, देश की राजधानी क्विटो से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है।
इसमें सबसे भयानक विस्फोट 1887 में हुआ था। वहीं साल 2015 में राखों के घने बादल निकलने लगे, जिसके बाद देश में अलर्ट जारी कर दिया गया था।
इसके बाद से ज्वालामुखी का लागातर मॉनिटर किया जाता रहा है।
तुनगुराहुआ, इक्वाडोर
ये ज्वालामुखी 5,019 मीटर ऊंचा है और यह इक्वाडोर की राजधानी क्विटो के दक्षिण करीब 180 किलोमीटर दूर है।
यह पेरू का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है, जिसकी सख्त निगरानी की जाती है।
साल 2006 से 2009 के बीच इसमें अधिक सक्रियता दर्ज की गई थी। जिसमें राख के बादल निकलने लगे थे और जहरीले गैस वातावरण में फैल गए थे। ज्वालामुखी के आसपास दस लाख लोग रहते हैं। साथ ही कई इमारतें भी आसपास हैं।
विलरिका, चिली
चिली में करीब 95 सक्रिय ज्वालामुखी है, उनमें से विलरिका 1847 मीटर ऊंचा है और यह सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है।
यह पर्यटन स्थलों के क्षेत्र में स्थित है। 2015 में ये भड़का था, जिसके बाद हवा में 1000 मीटर से उंचा लावा निकला था। उस वक्त आसपास के इलाकों को खाली करा दिया गया था।
कलब्यूको, चिली
चार दशक के बाद 2015 में कलब्यूको फटा था। फटने की पहले से उम्मीद नहीं थी। इसके फटने के बाद सरकार ने रेड अलर्ट जारी किया था और चार हजार से ज्यादा लोगों को वहां से निकाले गए थे।