हालांकि बेलारूस के आम नागरिक पूरी दुनिया में फैले कोरोना के कहर की खबरों से वाकिफ हैं और वो इस वायरस के बढ़ते कदमों को लेकर चिंता में हैं। मिंस्क में कई युवा और स्कूली छात्र बीमारी का बहाना बना तक छात्रों से भरी क्लास में जाने से बच रहे हैं।
छात्रों की परेशानी कम करने के लिए कॉलेज और युनिवर्सिटीज ने अपने क्लासेस का वक्त कुछ घंटे पहले कर दिया है, ताकि छात्र सार्वजनिक परिवहन में होने वाली भीड़ से बच सकें। मिंस्क की सड़कों पर लोग कम ही दिख रहे हैं और लोगों का कहना है कि उन्हें पता है कि बूढ़े लोगों को इस वायरस से अधिक खतरा है, लेकिन कोरोना को लेकर इस तरह का कोई जागरूकता अभियान अधिकारियों की तरफ से नहीं कराया जा रहा।
राष्ट्रपति लूकाशेन्को ने कहा है कि इस कारण चिंता करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि विदेशों से बेलारूस आने वाले सभी लोगों के कोरोना वायरस टेस्ट कराए जा रहे हैं। वो दावा करते हैं कि, 'एक दिन में दो या तीन लोगों के टेस्ट के नतीजे पॉजिटिव आ रहे हैं। ऐसे मामलों में उन्हें क्वारंटीन में भेजा जा रहा है और फिर उन्हें डेढ़ सप्ताह या दो सप्ताह बाद छोड़ा जा रहा है।'
'अफवाह फैलाने वालों को नहीं बख्शेंगे'
लूकाशेन्को कहते हैं कि चिंता करना और मानसिक तनाव लेना बेहद खतरनाक है, शायद ये वायरस से भी अधिक घातक है। उन्होंने देश की खुफिया एजेंसी बेलारूसी केजीबी को, 'आम लोगों के बीच अफवाह फैलाने और दहशत फैलाने वालों को पकड़ने' का आदेश दिया है। अब तक देश में कोरोना वायरस के कुल 86 मामले सामने आए हैं और यहां इस कारण मात्र दो मौतें हुई हैं। बेलारूस ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की है कि मौतों का कारण कोरोना है, लेकिन माना जा रहा है कि इन मौतों का कारण वायरस ही है।
बेलारूस कई अर्थों में यूरोप के दूसरे देशों से अलग है। ये यूरोप का आखिरी ऐसा देश है जहां अब भी मौत की सजा का प्रावधान है। देश की विपक्षी एक्टिविस्ट एंड्रे किम सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं, लेकिन इस मामले में वो राष्ट्रपति की बात से इत्तेफाक रखते हैं।
किम ने अपने फेसबुक पन्ने पर लिखा कि लूकाशेन्को बिल्कुल सही हैं, क्योंकि 'अगर वो पूरे देश के लोगों पर बाहर निकलने से जुड़े प्रतिबंध लगाते हैं तो बेलारूस की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। यहां चीजें अलग हैं और बेलारूस फिलहाल दुनिया का ऐसा एक मात्र देश है जहां सरकार लोगों का भला सोच कर काम करती है न कि जनकल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर करती है। मैं मानता हूं कि ये कहने पर मुझे कड़ी आलोचना झेलनी पड़ेगी, लेकिन जब हर तरफ पागलपन हो तो आप चुप नहीं रह सकते।'
वो कहते हैं 'पागलपन' से मेरा मतलब कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में जिस तरीके के कदम उठाए जा रहे हैं उनसे है। वो कहते हैं कि कुछ न कर के वो बेलारूस को दहशत से दूर रख रहे हैं।