ट्रेन से सफर करने वाले लगभग हर यात्री की अपनी एक पसंदीदा सीट होती है। कोई खिड़की वाली सीट पसंद करता है तो किसी को बीच की सीट ठीक लगती है। लेकिन अगर सबसे आरामदायक सीट की बात की जाए तो ज्यादातर लोग साइड लोअर बर्थ को ही चुनते हैं। वजह भी साफ है कि ये सीट न केवल आरामदायक होती है बल्कि सफर के दौरान आपको खुला और सुकून भरा अहसास कराती है। यही कारण है कि जब किसी यात्री को टिकट बुकिंग के समय यह सीट मिल जाती है तो वो खुद को काफी खुशकिस्मत मानता है। वहीं, जिन्हें यह सीट नहीं मिलती, वो अक्सर किसी न किसी तरीके से इसे पाने की कोशिश करने लगते हैं। ऐसा ही एक किस्सा हाल ही में सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। दरअसल, एक यात्री ने अपनी सूझबूझ से अपनी साइड लोअर सीट को बचा लिया और यह वाकया अब लोगों के बीच मिसाल बन गया है। आइए जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह घटना
उस यात्री ने अपने अनुभव को रेडिट पर साझा किया। उसने लिखा कि वह बेंगलुरु से अपने केरल स्थित घर की यात्रा पर निकला था। चूंकि वह हमेशा अकेले सफर करता है। इसलिए कोशिश यही करता है कि उसे साइड बर्थ मिल जाए। इस बार किस्मत ने उसका साथ दिया और उसे ए1 कोच में साइड लोअर बर्थ मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था। रात का समय था और वह आराम से सो रहा था। तभी आधी रात करीब बारह बजे एक कपल ट्रेन में चढ़ा।
पति-पत्नी ने की सीट कब्जा करने की कोशिश
यात्री के अनुसार कपल की उम्र लगभग 30 साल के आसपास रही होगी। महिला की सीट उसके ठीक ऊपर यानी साइड अपर बर्थ पर थी और पुरुष की सीट दूसरे कोच में। दोनों आपस में बात कर रहे थे और उसी दौरान उनकी आवाज से उस यात्री की नींद खुल गई। तभी उसे एहसास हुआ कि ये लोग उसकी सीट पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ देर बाद महिला का पति आया और उसने सीधे बिना कुछ सोचे-समझे पर्दा खींच दिया। इसके बाद वह यात्री को देखकर बोला, “क्या आप अगली कोच में जाकर सो सकते हैं?” सोचिए रात के बारह बजे कोई शख्स आराम से अपनी बर्थ पर सो रहा हो और अचानक कोई उससे कहे कि सब छोड़कर दूसरे कोच में चला जाए तो यह कितना गलत लगेगा। यही वजह थी कि यात्री ने तुरंत मना कर दिया।
महिला ने की यात्री से की बात
इसके बाद थोड़ी देर में महिला खुद उसके पास आई और बेपरवाही से बोली, “तू ऊपर चला जा भाई।” अब मामला सीधा-सीधा सीट हथियाने का था। लेकिन यात्री भी समझदार था। उसने बिना गुस्सा किए जवाब दिया, “मैं बीमार हूं, अगर मुझे उल्टी हो गई तो मैं नीचे नहीं उतर पाऊंगा।” इस जवाब का असर तुरंत हुआ। महिला ने बिना कोई बहस किए चुपचाप अपनी अपर बर्थ पर चढ़कर लेट गई। इसके बाद यात्री ने पूरी रात यानी करीब नौ घंटे का सफर शांति और आराम से पूरा किया।
यूजर्स ने दिए ऐसे रिएक्शंस
रेडिट पर जैसे ही इस अनुभव को साझा किया गया, कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। अधिकतर यूजर्स ने यात्री की तारीफ की और कहा कि ऐसे लोगों के साथ सख्ती से पेश आना ही सही है, तभी जाकर उन्हें सबक मिलेगा। यह पूरा वाकया इस बात की याद दिलाता है कि ट्रेन में हर किसी को अपनी-अपनी सीट पर ही सफर करना चाहिए। अगर सीट बदलनी भी हो तो सामने वाले की सहमति जरूरी है, वरना जबरदस्ती करना गलत है। यात्री की सूझबूझ ने न केवल उसकी नींद बचाई बल्कि उसे यह भी सिखाया कि कभी-कभी समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार होती है।