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Viral Post: जीरो नंबर देना पड़ा भारी, 50% वाली पॉलिसी के खिलाफ गईं टीचर, चली गई नौकरी

Mon, 10 Aug 2026 09:49 AM IST
दीक्षा पाठक फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Post: फ्लोरिडा के एक स्कूल में बिना असाइनमेंट जमा किए छात्रों को 50 फीसदी अंक देने की पॉलिसी पर टीचर डायने तिराडो ने आपत्ति जताई। उन्होंने काम नहीं करने वाले छात्रों को जीरो नंबर दिए, जिसके बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। हालांकि, स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने कहा कि उनकी बर्खास्तगी की वजह सिर्फ ग्रेडिंग पॉलिसी नहीं थी।
 
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जीरो नंबर देना पड़ा भारी - फोटो : इंस्टाग्राम fact.philes
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विस्तार
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फ्लोरिडा के एक स्कूल में ग्रेडिंग के एक नियम को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि एक टीचर को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। मामला पोर्ट सेंट लूसी के वेस्ट गेट K-8 स्कूल का है। यहां डायने तिराडो नाम की टीचर ने उन छात्रों को 50 फीसदी नंबर देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने पूरे साल कोई असाइनमेंट जमा नहीं किया था।  डायने का कहना था कि अगर किसी छात्र ने कोई काम ही नहीं किया है तो उसे आधे नंबर देना सही नहीं है। उन्होंने ऐसे छात्रों को जीरो नंबर दिए। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। तो आइए जानते हैं।

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वाइटबोर्ड पर लिखा भावुक संदेश
नौकरी जाने के बाद डायने ने क्लासरूम के वाइटबोर्ड पर अपने छात्रों के लिए एक भावुक संदेश भी छोड़ा। उन्होंने लिखा कि वह बच्चों से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन बिना कोई काम किए उन्हें 50 फीसदी अंक देने का नियम उनकी एथिक्स यानी नैतिकता के खिलाफ था।




लोगों ने उठाया यह सवाल
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर किसी छात्र ने पूरे साल कोई काम नहीं किया और फिर भी उसे 50 फीसदी नंबर मिल जाते हैं तो क्या इससे मेहनत करने वाले छात्रों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी? साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि ऐसी पॉलिसी बच्चों को पढ़ाई और असाइनमेंट को लेकर किस तरह का संदेश देती है।
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अधिकारियों ने डायने की बर्खास्तगी को क्या बताया?
हालांकि, स्कूल डिस्ट्रिक्ट के अधिकारियों ने डायने की बर्खास्तगी को केवल इस ग्रेडिंग नियम से जोड़ने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला गया क्योंकि उन्होंने 50 फीसदी नंबर देने वाली पॉलिसी का विरोध किया था। उनके मुताबिक डायने के काम करने के तरीके और प्रोफेशनल व्यवहार को लेकर भी कई शिकायतें थीं।

 छात्रों की मेहनत को लेकर चर्चा तेज हो गई
यानी मामले में स्कूल प्रशासन और टीचर की तरफ से अलग-अलग बातें सामने आई हैं। एक तरफ डायने का कहना है कि बिना काम किए छात्रों को 50 फीसदी अंक देना उनकी नैतिकता के खिलाफ था। वहीं, स्कूल डिस्ट्रिक्ट का कहना है कि उनकी नौकरी जाने के पीछे दूसरी शिकायतें भी थीं। इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था में नंबर देने के तरीके और छात्रों की मेहनत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया यूजर्स भी इसी सवाल पर बंटे नजर आ रहे हैं कि बच्चों को प्रोत्साहित करने और बिना मेहनत के नंबर देने के बीच आखिर सही संतुलन क्या होना चाहिए।

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