विदेश की चमक-दमक के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई
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विदेश जाकर पढ़ाई करना और उसके बाद लाखों रुपये का पैकेज हासिल करना आज कई युवाओं का सपना है। परिवार भी बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी जमा-पूंजी तक लगा देते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद कमाई और बचत का गणित कई बार उम्मीद से बिल्कुल अलग निकल सकता है। कनाडा के टोरंटो से जुड़ा ऐसा ही एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी घटना के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह घटना
वेल्थ एडवाइजर हर्ष गुप्ता ने इंस्टाग्राम पर एक मामला साझा किया है। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त के परिवार ने बेटे की मास्टर डिग्री के लिए 15 साल पुरानी एफडी तक तुड़वा दी। परिवार ने उसकी पढ़ाई और विदेश जाने पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए। बेटा टोरंटो पहुंचा और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी भी हासिल कर ली, लेकिन इसके बाद सामने आया कमाई और खर्च का ऐसा हिसाब, जिसने पूरे फैसले पर सवाल खड़े कर दिए।
50 लाख किया खर्च फिर भी पैसे को मोहताज हुआ युवक
हर्ष गुप्ता के मुताबिक युवक को कनाडा में सालाना 55 हजार कैनेडियन डॉलर की नौकरी मिली। पहली नजर में यह रकम काफी अच्छी लगती है, लेकिन असल तस्वीर टैक्स और रोजमर्रा के खर्च काटने के बाद सामने आती है। नौकरी से मिलने वाली रकम में से टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा घर का किराया और कनाडा की कड़ाके की ठंड में रहने से जुड़े खर्च भी काफी हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए ऐसे रिएक्शंस
इन सभी खर्चों के बाद युवक के पास बचने वाली रकम इतनी कम रह जाती है कि हर्ष के मुताबिक वह भारत के किसी छोटे शहर में मिलने वाली आम नौकरी से भी कम बचत कर पा रहा है। उनका कहना है कि अगर परिवार के 50 लाख रुपये भारत में ही निवेश किए गए होते तो भविष्य के लिहाज से स्थिति कहीं ज्यादा सुरक्षित हो सकती थी। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने बिना पूरा आर्थिक हिसाब लगाए इतना बड़ा निवेश करने को जोखिम भरा बताया। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि विदेश की महंगी डिग्री हर किसी के लिए फायदे का सौदा नहीं रह गई है।