फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मजाक-मजाक में बना था यह देश, चौराहे पर टंगा है यहां का संविधान, लिखी हैं अजीबोगरीब बातें

Fri, 20 Dec 2019 10:26 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 15
मजाक-मजाक में बना देश - फोटो : Social media
एक अप्रैल को अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। यानी मूर्खता का दिन। लोग इस दिन दोस्तों और जानने-पहचानने वालों को मूर्ख बनाते हैं। लेकिन, क्या ऐसा हो सकता है कि एक मजाक, एक भरे-पूरे देश में तब्दील हो जाए? ऐसा ही हुआ आज से 21 साल पहले, बाल्टिक देश लिथुआनिया में। वहां एक अप्रैल को कुछ लोगों ने तय किया कि वो अपने मुहल्ले को अलग देश घोषित कर दें। मजाक में तय की गई बात आज हकीकत बन गई है। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
इस बित्ते भर के देश का नाम है उजुपियाइस रिपब्लिक। लिथुआनिया की राजधानी विलिनियस के एक हिस्से में बसे इस देश का अपना संविधान, सरकार और झंडा भी है। उजुपियाइस के लोग कहते हैं कि आप यहां बने जलपरी के बुत की आंखों में आंखें डाल कर देख लें, तो आप कभी भी इस मुल्क को छोड़ कर नहीं जाना चाहेंगे। इस बुत को 2002 में रोमास विलसियास्कस ने बनाया था। कांसे की ये मूर्ति इस छोटे से देश में आने वाले हर शख्स का स्वागत करती है। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि ये जलपरी ही दुनिया भर से लोगों को अपनी दिलकशी से लुभाकर उनके देश लाती है।  
विज्ञापन

3 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
लिथुआनिया की राजधानी के एक मुहल्ले भर में आबाद उजुपियाइस देश का कुल इलाका एक वर्ग किलोमीटर से भी कम है। लेकिन, आप इसके छोटे से आकार पर न जाएं। यहां एक राष्ट्रपति हैं। भरी-पूरी सरकार है। उजुपियाइस का अपना संविधान है और करेंसी भी है। यही नहीं, इस मुहल्ले के बराबर देश के पास अपनी नौसेना भी है, जिसके पास चार नावें हैं। इनका इस्तेमाल सरकारी समारोहों में होता है। कुछ दिनों पहले तक इस देश के पास दस सैनिकों वाली सेना भी हुआ करती थी, लेकिन चूंकि ये गणराज्य शांतिप्रिय है, तो इसने सेना को खत्म कर दिया है। 

4 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
उजुपियाइस में हमें सोवियत संघ के दौर का आर्किटेक्चर भी देखने को मिलता है और आज के दौर की कलाकारी भी। 1990 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद उस दौर के तमाम नायकों की मूर्तियां तो हटा दी गईं। मगर, शहर में उन्हें लगाने के लिए बने खंभे रह गए। इन खाली खंभों को भरने का काम 1995 में स्थानीय कलाकारों ने शुरू किया। एक पर अमेरिकी रॉक कलाकार फ्रैंक जप्पा का बुत लगा दिया गया। दो साल बाद यानी एक अप्रैल 1997 को स्थानीय कलाकारों ने उजुपियाइस को लिथुआनिया से अलग, एक स्वतंत्र गणराज्य घोषित कर दिया। हालांकि, फिलहाल किसी भी देश ने उजुपियाइस को मान्यता नहीं दी है। मगर इससे उजुपियाइस को अलग देश मानने वालों के हौसले पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। 
विज्ञापन

5 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
आज लिथुआनिया की राजधानी विलिनियस में बहुत से लोग उज़ुपियाइस के अस्तित्व को बड़े गुरूर से बताते हैं। लिथुआनिया की भाषा में उजुपियाइस का मतलब होता है, नदी के पार। ये इलाका विलनेले नदी के पार बसा है। ये गणतंत्र एक अप्रैल को अपनी आजादी का जश्न मनाता है। इसे स्थानीय लोग उजुपियाइस डे कहते हैं। इस दिन घूमने आने वालों को पुल पर ही इस देश का पासपोर्ट दिया जाता है। वो लोग यहां की गैर मान्यता प्राप्त करेंसी से बीयर खरीद कर पी सकते हैं। ये बीयर देश के मुख्य चौराहे के मुंह से बहती रहती है।
विज्ञापन

6 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक का संविधान - फोटो : Social media
मजाक में हुई एक शुरुआत आज एक देश को लेकर लोगों के बीच संजीदा कोशिश बन गई है। आज उजुपियाइस का अपना संविधान है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उजुपियाइस के विदेश मंत्री टोमास सेपाइटियास इस देश के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। टोमास कहते हैं कि उनके देश का जन्म ग्रीक दार्शनिक अरस्तू की सोच पर आधारित है। अरस्तू कहा करते थे कि किसी भी महान शहर की आबादी ज्यादा नहीं होनी चाहिए। टोमास कहते हैं कि, हम एक ऐसा छोटा सा देश बनाना चाहते थे जिसमें पांच हजार से ज्यादा लोग न हों। वजह ये कि इंसान का दिमाग बहुत सारे चेहरों को याद नहीं रख पाता है। यहां हर शख्स बाकी के लोगों को जानता है। लोग एक-दूसरे से बेईमानी नहीं कर पाते। किसी को मूर्ख नहीं बना पाते।
विज्ञापन

7 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक का झंडा - फोटो : Social media
उजुपियाइस के झंडे में एक पवित्र हाथ बना हुआ है, जिसके बीच में छेद है। यानी ये रिश्वत नहीं ले सकता। उजुपियाइस के पर्यटन मंत्री केस्टास ल्यूकोस्किनास कहते हैं कि, इस झंडे की खास बात ये है कि हमारे पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है। विदेश मंत्री टोमास कहते हैं कि वो और उनके दोस्त ऐसा देश बनाना चाहते थे, जहां लोग आधुनिक जिंदगी की दखलंदाजी से दूर हों और एक-दूसरे से जुड़ सकें। टोमास कहते हैं कि, पुल पार करने के बाद आप खुद से मिल जाते हैं। आपकी कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं होती। आप पर किसी की हुकूमत नहीं होती। आप खुदमुख्तार होते हैं। आप अपने बारे में सोच सकते हैं। आप पागलपन भरी उस दौड़ से अलग हो जाते हैं, जिसमें आज दुनिया का हर इंसान मुब्तिला है।

8 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
पर्यटन मंत्री ल्यूकोस्किनास भी टोमास की बातों से इत्तेफाक रखते हैं। वो कहते हैं कि, 'उजुपियाइस का माहौल बिल्कुल अलग है। यहां आप ज्यादा शांत और खुश महसूस करते हैं। आप किसी पब में जाकर शहर के मेयर से मिल सकते हैं। किसी मशहूर खिलाड़ी या कलाकार से मुलाकात कर सकते हैं। सब मस्ती करते रहते हैं। किसी और जगह आप को बड़े महंगे बार या रेस्टोरेंट में जाना पड़ेगा। वहां कई तरह की पाबंदियां होती हैं। एक तय कायदा होता है। उजुपियाइस में ऐसा कुछ नहीं है। 

9 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
भले ही इस देश की स्थापना मजाक में हुई हो, मगर इसका इतिहास बहुत शानदार है। बीसवीं सदी के मध्य में ये इलाका सोवियत संघ का हिस्सा था। तब इस मुहल्ले की हालत बहुत खराब थी। ये बहुत खतरनाक इलाका माना जाता था। यहां की एक मशहूर सड़क उजुपियाइस स्ट्रीट को स्ट्रीट ऑफ डेथ कहा जाता था। यहां जुर्म बहुत होते थे। मुहल्ले की यहूदी आबादी को अलग पहचान मिली हुई थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन यहूदियों को जर्मन सेना ने मार दिया था। मगर, आज यहां की हर गली में छोटी-मोटी कलाकृति देखने को मिल जाएगी।  

10 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
1997 में उजुपियाइस को आजाद मुल्क घोषित करने के बाद इसका संविधान बनाया गया। इसे टोमास और उजुपियाइस के राष्ट्रपति रोमास लिलेइकिस ने महज तीन घंटे में लिख डाला था। टोमास कहते हैं कि, 'हमने ताजा-ताजा उजुपियाइस को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया था। तब रोमन मेरे पास आए क्योंकि उनके घर में गर्म पानी नहीं था। इसीलिए हमारे संविधान में गर्म पानी को लेकर भी एक अनुच्छेद है।' उजुपियाइस के संविधान के दूसरे अनुच्छेद के मुताबिक यहां सभी को गर्म पानी का अधिकार हासिल है। सर्दियों में घर गर्म रखने का अधिकार है। हर घर में टाइल वाली छत रखने का हक है। टोमास कहते हैं कि, 'जब रोमन ने गर्म पानी से नहा लिया, तो दोनों ने मिलकर सोचा कि अब एक देश बना लिया है, तो हमें इसके लिए दस्तावेज तैयार करने होंगे। तो, हम दोनों ने मिल-बैठकर तीन घंटे में नए देश का संविधान लिख डाला।' 

11 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक का संविधान - फोटो : Social media
उजुपियाइस के संविधान में 41 धाराएं हैं। उसमें सोचने की आजादी को बहुत अहमियत दी गई है। जैसे कि, सब को मृत्यु का अधिकार है, मगर कोई जबरदस्ती नहीं है। सब को समझने का अधिकार है। सब को न समझने का भी अधिकार है। संविधान में इस गणतंत्र के जानवरों के अधिकारों का भी जिक्र है। जैसे, कुत्ते को ये हक है कि वो कुत्ता बना रहे। बिल्ली के साथ ये जबरदस्ती नहीं की जा सकती कि वो अपने मालिक से मुहब्बत करे ही। हालांकि जानवरों को मालिक की जरूरत के वक्त मदद करनी होगी। टोमास कहते हैं कि, 'मुझे बिल्लियां पसंद हैं, तो मैंने बिल्लियों के बारे में लिखा। रोमन को कुत्ते पालना अच्छा लगता है, तो उसने कुत्तों के बारे में लिखा। इससे संविधान में संतुलन आया।'

12 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
देश का संविधान मोटे अक्षरों में लिख कर संविधान चौराहे पर टांगा गया है। इसे धातुओं की तख्ती पर उकेरा गया है। सितंबर में जब पोप यहां आए तो उन्होंने इलाके के लोगों को आशीर्वाद भी दिया था। इस देश के केंद्रीय चौराहे पर आर्कैन्जेल गैब्रिएल की मूर्ति लगी है। इसे 2002 में लगाया गया था। गैब्रिएल को विकास और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है। उजुपियाइस की आरामतलबी का नतीजा ये है कि यहां सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति भी मजे में ही की जाती है। इस देश की संसद यहां के एक कैफे में बैठती है। एक दर्जन मंत्रियों का समूह इस देश की हुकूमत चलाता है। अगर आप को यहां की राजनीति में शामिल होना है, तो आप को सामुदायिक सेवा करनी पड़ती है। 

13 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक के राष्ट्रपति (बाएं) अन्य व्यक्तियों के साथ - फोटो : Social media
ल्यूकोस्किनास कहते हैं कि, 'अहम बात ये है कि लोग आप को पहचान लें। आप खुद को फुटबॉल या किसी और विभाग का मंत्री बता सकते हैं, लेकिन लोगों को आप की पहचान होनी चाहिए। ये एक गंभीर मसला है।' पिछले 21 साल से उजुपियाइस की सरकार मजे में चल रही है। इस दौरान रोमन ही देश के राष्ट्रपति बने हुए हैं। हालांकि वो कहते हैं कि वो काम से कुछ दिनों की छुट्टी चाहते हैं। मंत्रियों की बैठक सोमवार को हुआ करती है। इस देश के मंत्री दूसरे मुल्कों से संबंधन बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते हैं। हालांकि ये आधिकारिक नहीं है। 

14 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक में दलाई लामा - फोटो : Social media
उजुपियाइस में तिब्बत के नाम से एक चौराहा है। उजुपियाइस ने जब दलाई लामा को अपने देश का नागरिक बनाया, तो चीन भड़क गया था। मजे की बात ये है कि चीन की नाराजगी से उजुपियाइस के लोग ना सहमत हैं और न ही असहमत। 1997 में अस्तित्व में आने से ही पर्यटक उजुपियाइस में काफी दिलचस्पी दिखाते रहे हैं। अलग देश घोषित होने के बाद यहां कई इलाकों का सौंदर्यीकरण हुआ है। इसकी वजह से उजुपियाइस में संपत्ति के दाम बढ़ गए हैं। 
विज्ञापन

15 of 15
उजुपियाइस रिपब्लिक - फोटो : Social media
आज की तारीख में ये लिथुआनिया की राजधानी विलिनियस का दूसरा सबसे महंगा इलाका है। आज यहां कोई कलाकार एक फ्लैट नहीं खरीद सकता। ल्यूकोस्किनास कहते हैं कि यहां फ्लैट लेने के लिए ही आप को मशहूर और अमीर होना होगा। कई मंत्री इससे फिक्रमंद हैं। उन्हें लगता है कि इससे तो वो अपनी संस्कृति गंवा बैठेंगे। जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, मंत्रियों की चिंता भी बढ़ रही है। हालांकि टोमास को लगता है कि इससे देश की तरक्की हो रही है। टोमास कहते हैं कि, 'मैं इस बात से बहुत उत्साहित हूं कि मैं तमाम तरह के लोगों से मिल सकता हूं। आज ये देश ख्वाब और हकीकत की मिली-जुली तस्वीर है। हमें उम्मीद है कि आगे चल कर लोग ये जरूर कहेंगे कि हम ने अपने देश की स्थापना की थी। एक सपने को सच किया था। यही हमारा लक्ष्य है। मैं बहुत खुश हूं।' 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें