100 साल बाद वैज्ञानिकों ने खोजा ऐसा अनोखा जानवर
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दुनिया में आज भी कई ऐसे जानवर हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को पूरी जानकारी नहीं है। कई बार कोई जानवर वर्षों तक इंसानों के आसपास रहता है, लेकिन उसकी असली पहचान सामने नहीं आ पाती। ऐसा ही एक मामला बोलीविया से सामने आया है। यहां एक छोटी सी जंगली बिल्ली को पहले आम बिल्ली समझा गया, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि वह एक अलग प्रजाति है। इस खोज ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है।
बिल्ली का छोटा बच्चा मिला
इस कहानी की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। बोलीविया के युंगास इलाके में एक शख्स को जंगल के पास बिल्ली का एक छोटा बच्चा मिला। वह उसे घर ले आया और करीब एक साल तक उसकी देखभाल करता रहा। शुरुआत में उसे लगा कि यह आम पालतू बिल्ली है, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसकी बनावट और शरीर पर बने निशान देखकर उसे शक होने लगा। इसके बाद वह बिल्ली को सेंडा वर्दे वन्यजीव केंद्र ले गया। वहां मौजूद विशेषज्ञों ने भी पहले इसे जंगली बिल्लियों के एक जाने-पहचाने समूह का हिस्सा माना। हालांकि, इसकी असली पहचान को लेकर सवाल बने रहे।
डीएनए जांच से सामने आई असली पहचान
बोलीविया की जीव वैज्ञानिक पाओला नोगालेस-अस्कारुंज ने इस बिल्ली पर ध्यान दिया। इसके शरीर पर बने धब्बे और दूसरी शारीरिक विशेषताएं पहले से पहचानी गई जंगली बिल्लियों से कुछ अलग थीं। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसकी आनुवंशिक बनावट यानी डीएनए की जांच की।
दक्षिण अमेरिका की कई जंगली बिल्लियों के आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना करने पर पता चला कि यह पहले से पहचानी गई प्रजातियों से अलग है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे नई प्रजाति के रूप में पहचान दी। इसका वैज्ञानिक नाम लियोपार्डस टिल्कायो है।
100 साल से ज्यादा समय बाद हुई ऐसी खोज
इस खोज से जुड़ा अध्ययन करंट बायोलॉजी नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ। वैज्ञानिकों के मुताबिक 100 साल से ज्यादा समय बाद जीवित बिल्ली की एक नई प्रजाति का औपचारिक वर्णन किया गया है। इस बिल्ली का आकार घरेलू बिल्ली से भी छोटा है और इसके शरीर पर गहरे रंग के धब्बे हैं।,गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी इस अनोखी बिल्ली की तस्वीरें और इससे जुड़ी जानकारी साझा की है। हालांकि, अभी इस प्रजाति की संख्या और जंगलों में इसके फैलाव के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। वैज्ञानिक अब इसके बारे में और जानने की कोशिश कर रहे हैं।