क्या कभी कोई जिंदा होते हुए भी खुद को मरा हुआ मान सकता है? वो भी पल भर के लिए बल्कि जिंदगी के पूरे तीन सालों तक। डेली मेल के मुताबिक 17 साल की हेली स्मिथ पिछले तीन सालों से खुद को मर चुका मानती थीं।
उन्हें कभी ऐसा लगता ही नहीं था वो जिंदा है। वो जी तो रही थी, पर हमेशा एक ऐसा अहसास होता है जैसे उनके कोई भी अंग काम नहीं कर रहें हैं।
जैसे उन्हें कभी खाना भी खाने का मन नहीं होता और खुद को भूखा रखकर उन्हें शांति मिलती। वो डॉक्टरी जांच के बाद इसकी वजह भी जानती थी, लेकिन फिर भी खुद की मदद नहीं कर पाती।
कोटार्ड सिंड्रोम की है शिकार
मेडिकल साइंस की दुनिया में इस बीमारी को वॉकिंग कॉपर्स सिंड्रोम नाम से जाना जाता है। इसे कोटार्ड सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। ये अति दुर्लभ बीमारी है।
लेकिन हेली कहती हैं कि उनकी किस्मत अच्छी थी कि वक्त रहते ठीक तरह के इलाज और डिस्नी कार्टून ने जिंदा रहना सिखाया। उन्होंने बताया कि उनके ब्वॉयफ्रेंड उन्हें उनकी पसंदीदा चीज यानी के कार्टून खूब दिखाते थे।
जेरेमी जानते थे कि हर वक्ज मरा हुआ महसूस करने के बाद भी कार्टून देखकर वो जीवित महसूस करती हैं।
साथ ही एक थेरपिस्ट की मदद से उन्होंने किसी तरह खुद को इस बीमारी से बाहर निकाला।
ऐसे लोग ज्यादातर अंजाने में मरते हैं
डॉक्टर बताते हैं कि कोटार्ड सिंड्रोम से पीड़ित लोग खुद को चोट पहुंचा-पहुंचाकर मार डालते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि वो खाना नहीं खाते और भूखा रहकर मौत को गले लगा लेते हैं।
अपनी बीमारी से किसी तरह निकलने के बाद अब मिस स्मिथ लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने और वक्त रहते सही फैसले लेने के लिए बढ़-चढ़कर काम करती हैं।
वो कहती हैं कि एक वक्त था जब उन्हें जीना ही नहीं भाता था क्योंकि वो खुद को मरा मान चुकी थी। लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है।