दो बच्चों की यह मां बहुत ही दर्दनाक स्थिति से गुजर रही है। 34 साल की एलिस मान को बिना बात अपनी ही खाल नोचने की बीमारी है। यह एक दिन में लगभग तीन घंटे अपनी खाल नोचने में ही बिता देती है और अब ये खुद को बचाने के लिए सबसे मदद मांग रही है।
डर्मैटिलोमेनिया नाम की यह बीमारी एक तरह की दिमागी स्थिति है जिसके कारण मरीज एक खास तरह की हरकत करने से खुद को रोक नहीं पाता और घाव या नुकसान होने के बावजूग करता रहता है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है और एलिस अब संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार शुरू करने वाली हैं। एलिस को उम्मीद है कि इससे उनकी हालत में कुछ सुधार आएगा।
एलिस कहती हैं,'' मैं अपनी खाल नहीं नोच कर खुद को तकलीफ नहीं देना चाहती लेकिन मैं मजबूर हूं। जैसे लोग नाखून खाने की अपनी आदत से मजबूर होते हैं। ऐसा कर के पहले तो मुझे बहुत सुकून मिलता है लेकिन बाद में शर्म महसूस होती है।''
अंजाने में की कर डालती है खुद को घायल
एलिस कहती हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कब वे खुद को नोचने लगती हैं, जैसे टीवी देखते देखते या कुछ भी काम करते करते वह करने लगती हैं।
उन्हें याद है जब वे नौ साल की थीं तब पहली बार उन्होंने स्कूल ब्रेक के दौरान अपने घुटने से पपड़ी निकाल डाली थी। तभी से यह आदत उनके पीछे लगी है। वह ज्यादातर अपने पैर की खाल नोचती हैं लेकिन सीने, चेहरे, हाथ या शरीर का और कोई भी हिस्सा इससे अछूता नहीं है।
वह बताती हैं कि उन्हें अपनी त्वचा बिलकुल मुलायम चाहिए इसीलिए अरग कहीं भी जरा सी भी खरोच या पपड़ी देख लेती हैं तो नोचने लगती हैं। जब तक वहां निशान नहीं पड़ जाता, वो ये करती रहती हैं।
धब्बेदार पैरों ने कर दिया शर्मिंदा
एलिस का पति उसे रोकता भी है लेकिन वह नहीं रुख पाती। एलिस के दो बच्चे हैं और उन्हें चिंता है कि उनकी इस आदत का कहीं उनके बच्चों पर भी गलत असर न पड़े। एक बार उन्होंने अपनी बेटी को अपने चेहरे से पपड़ी नोचते देखा था तो वह डर गई थीं। वह उम्मीद करती हैं कि जब तक उनका बेटा थोड़ा बड़ा होगा तब तक वे इस बीमारी से निजात पा चुकी होंगी।
एलिस को अफसोस होता है कि अपनी खराब त्वचा के कारण न तो वे छोटे कपड़े पहन पाती हैं, न बच्चों को स्वीमिंग के लिए ले जा पाती हैं। वे आशा करती हैं कि किसी लेजर ऑपरेशन से उनके ये दाग धब्बे चले जाएं ताकि उन्हें शर्मिंदा न होना पड़े।