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सौरमंडल: शांत हो रहा सूर्य फिर उग्र, वैज्ञानिक हैरान; बृहस्पति से 5 गुना भारी सुपर-जुपिटर, 180 दिन में एक साल

Wed, 29 Jul 2026 09:58 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।

सार

  • शांत हो रहा सूर्य फिर उग्र, वैज्ञानिक हैरान; सौर हवा हुई ज्यादा घनी-गर्म व ताकतवर, चुंबकीय क्षेत्र भी मजबूत।
  • बृहस्पति से 5 गुना भारी सुपर-जुपिटर के मामले में चार साल की निगरानी और करीब 200 रातों के अवलोकन से खुला एनजीटीएस-38 बी का राज।
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सौरमंडल से जुड़े रहस्यों पर शोध कर रहे हैं खगोल विज्ञानी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- एजेंसी
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विस्तार
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करीब दो दशक पहले सूर्य की लगातार घटती गतिविधियों ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि यह दशकों तक चलने वाले लंबे शांत दौर में आने वाला है। 2008 में उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गईं। सूर्य पर धब्बे बेहद कम हो गए और उससे निकलने वाली सौर हवा भी असाधारण रूप से कमजोर पड़ गई, लेकिन इसके बाद सूर्य ने वैज्ञानिकों की आशंकाएं पलट दीं।

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अब ज्यादा घनी-गर्म व ताकतवर सौर हवा
बीते 17 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि सौर हवा अब ज्यादा घनी-गर्म व ताकतवर है, अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र भी मजबूत हुआ है। सूर्य की इस सक्रियता का सीधा असर मौसम पर पड़ सकता है। इससे उपग्रह, जीपीएस नेविगेशन, रेडियो संचार व बिजली ग्रिड में जोखिम बढ़ेगा। 

गति 6%, दबाव 34%, ऊर्जा 40% बढ़ी सबसे महत्वपूर्ण बदलाव सौर हवा की गति से ज्यादा उसकी ताकत और संरचना में मिला। 2008 से 2025 के बीच सौर हवा की गति करीब 6% बढ़ी, जबकि प्रोटॉन घनत्व लगभग 26% और तापमान 29% बढ़ गया। मास फ्लक्स में 27%, डायनेमिक प्रेशर में 34% और एनर्जी फ्लक्स में 40% वृद्धि दर्ज हुई। सबसे ज्यादा करीब 45% वृद्धि थर्मल प्रेशर में हुई। अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र की ताकत 31% और उसके रेडियल घटक में करीब 33% बढ़ी। यानी 2008 के मुकाबले सौर हवा ज्यादा घनी, गर्म हो गई।
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बृहस्पति से 5 गुना भारी सुपर-जुपिटर 180 दिन में पूरा करता है एक वर्ष
खगोल वैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल से बाहर एक ऐसे विशाल ग्रह का पता लगाया है, जिसका द्रव्यमान बृहस्पति से करीब पांच गुना अधिक है, लेकिन आकार उससे महज 8% बड़ा है। एनजीटीएस-38 बी नाम का यह एक्सोप्लैनेट अपने तारे की एक परिक्रमा करीब 180 दिनों में पूरी करता है। इतनी लंबी कक्षा वाले ग्रहों को मौजूदा तकनीक से पकड़ना कठिन होता है, इसलिए वैज्ञानिक इसे विशाल ग्रहों के निर्माण और विकास को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण खोज मान रहे हैं। इससे जुड़ा शोध वैज्ञानिक जर्नल मंथली नोटिसेज रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है। 

तारे की रोशनी ने बताया ग्रह का पता... ट्रांजिट विधि तकनीक से इस ग्रह को खोजा गया। इस तकनीक में तारे की रोशनी में आई कमी पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण से उसके तारे में पैदा होने वाली गति को मापकर इसका पता लगाया।

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