हेल्पिंग हैंड्स
इलेक्ट्रॉनिक त्वचा (एक तरह से कृत्रिम त्वचा) और माइक्रो/मैक्रोइलेक्ट्रॉनिक जैसे विषयों में मेरी शुरू से ही दिलचस्पी रही है। यही वजह है कि अब तक इन्हीं विषयों से जुड़े मेरे दो सौ से ज्यादा शोध पत्र विभिन्न जर्नल और किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। हाल ही में मैंने 'हेल्पिंग हैंड्स'- थ्रीडी प्रिंटेड सेंसिटिव प्रोस्थेटिक्स पर केंद्रित एक छात्र समूह की स्थापना की है। इस क्षेत्र से जुड़े नए लोगों की मदद करना ही इस क्लब का उद्देश्य है।
इलेक्ट्रॉनिक त्वचा का अर्थ सेंसरों के ऐसे सेट से है, जो कि एकाधिक मानकों को मापने के लिए प्रयुक्त होता है। सिलिकॉन आधारित वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी केवल सपाट और स्थिर आधार पर उपयोगी है। मेरी कोशिश है कि मैं सकारात्मक परिवर्तन करते हुए लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए नई तकनीक ईजाद करूं। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मैंने कई पुरानी तकनीकों को भी नए तरीकों से दोबारा परिभाषित किया है।
तकनीक ने हमें इतना सक्षम बना दिया है कि हम निर्जीव चीजों को भी गतिशील बना सकते हैं। बुजुर्गों की बढ़ती आबादी (खासकर पश्चिमी दुनिया में) को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि उनके जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जाए। रोबोट ऐसे लोगों की कई तरह से मदद कर सकते हैं, मगर उसके लिए भी यह आवश्यक है कि ऐसे रोबोट हर दृष्टिकोण से बेहतर हों। आज की स्थिति में रोबोट पिंजरों या बंद कमरों में काम करते हैं और किसी भी प्रकार की आशंका के कारण उस जगह इंसानों को जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। इन रोबोटों को एनिमेट या किसी संवेदनशील कृत्रिम त्वचा से सुसज्जित करके इंसानों की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है। भविष्य में, जब रोबोट और इंसान एक साथ काम करेंगे, उस स्थिति के लिए यह बेहद जरूरी खोज है।
ऊर्जा-स्वायत्त कृत्रिम अंग की अवधारणा
मेरा अब तक का काम बस एक शुरुआत भर है। मेरा अगला मकसद बिजली उत्पादन तकनीक को विकसित करना है, जिससे कि इसका उपयोग उन मोटरों को शक्ति देने के लिए किया जा सके, जो कृत्रिम हाथ को चलाते हैं। इसके बाद ऊर्जा-स्वायत्त कृत्रिम अंग की अवधारणा पूरी तरह से साकार हो सकती है।
-'ब्रेनी स्किन' जैसे रोबोटिक क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिक के साक्षात्कारों पर आधारित।