कॉनज्वाइंड ट्विंस के पैदा होने की संख्या कम है। पचास हजार बच्चों में से दो बच्चे ही ऐसे होते हैं जो कॉनज्वाइंड ट्विंस हों। ऐसे बच्चों को साइमीज ट्विंस भी कहते हैं।
ऐसे ही बच्चे हाल ही में राजकोट, गुजरात के पंडित दीनदयाल उपाध्याय गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज में पैदा हुए। लेकिन वो केवल छह मिनटों तक ही जी सके।
इन बच्चों को सिजेरियन से गर्भ से बाहर निकाला गया था। बच्चों की मां का सात महीनों तक कोई अल्ट्रासाउंड या स्कैन नहीं हुआ था।
इस वजह से कई दिनों तक ये पता ही नहीं चल पाया कि गर्भ में कॉनज्वाइंड ट्विंस पल रहे हैं। डॉक्टरों ने बच्चों को पैदा करवाने के बाद ही कह दिया था कि
ये जिंदा नहीं रह पाएंगे।
दोनों बच्चों के सिर, दिमाग एक ही थे। पर धड़ से दोनों अलग थे। गायनोकॉलोजी का ये देश में दुर्लभ मामला था।
बच्चों की मां को उनकी मौत के बाद हॉस्पिटल से अगले दिन ही डिस्चार्ज कर दिया गया। बच्चों के पिता ने बच्चों के अंग को दान देने की बात कही।
मेडिकल रीसर्च के लिए बच्चों के अंदरूनी अंग जो ठीक थे, उन्हें दान दे दिया जाएगा।