बीमारी या अजूबा?
भारत में इस तरह के बच्चों को अलग-अलग नज़रिए से देखा जाता है। कोई इन्हें शुभ मानता है तो कोई अशुभ, तो कोई अनोखा। लेकिन क्या सच में इस तरह के बच्चों का जन्म कोई अजूबा है या कोई बीमारी? मैक्स हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कपिल विद्यार्थी कहते हैं कि ऐसे बच्चों का जन्म कोई आश्चर्य की बात नहीं है। दरअसल, ये पूरा मामला जुड़वा बच्चे से जुड़ा है। मां के गर्भ में अंडा बनने के बाद कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिसकी वजह से गर्भ में जुड़वा बच्चे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं।
डॉक्टर विद्यार्थी अपनी बात को कुछ इस तरह समझाते हैं।
"ऐसे मामलों में अंडे का जितना भाग जुड़ा होता है उतना विकसित न होकर बाकी भाग विकसित हो जाता है। और शरीर के अंग बन जाते हैं। मतलब, अगर कोई अंडा पूरी तरह दो भागों में विभाजित न हो तो जब बच्चा पैदा होगा उसके शरीर के अंग जुड़े हुए हो सकते हैं।" वे कहते हैं, "अगर मां के गर्भ में अंडा पूरी तरह दो भागों में विभाजित हो जाता है तो बच्चे जुड़वा होंगे। और अगर अंडे पूरी तरह विभाजित नहीं हुए तो दो तरह के जुड़वा बच्चे पैदा हो सकते हैं।"
दो तरह के जुड़वा बच्चे
मैक्स हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पी धर्मेंद्र बताते हैं कि गोरखपुर में पैदा हुआ बच्चा 'पैरासिटिक ट्विन' का एक उदाहरण है। आसान शब्दों में समझाते हुए डॉक्टर धर्मेंद्र कहते हैं, "जुड़वा बच्चे होने तो थे पर वो किसी कारण से पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए और उनके शरीर का कुछ ही हिस्सा विकसित हो पाया। इस कारण पूरी तरह से विकसित न होने पर एक ही बच्चे के अतिरिक्त अंग बन गए।"
इसी तरह कंजॉइन्ड ट्विन भी होते हैं, ऐसे बच्चे जो विकसित तो होते हैं लेकिन उनके शरीर का कुछ हिस्सा या कोई एक हिस्सा जुड़ा हुआ होता है। दोनों ही तरह के मामलों में बच्चों का ऑपरेशन करके अलग किया जा सकता है। डॉक्टर धर्मेंद्र का कहना है कि यदि बच्चे के शरीर का निचला हिस्सा जुड़ा हुआ है तो उसे ऑपरेशन से अलग किया जा सकता है। अगर रीढ़ की हड्डी वाला हिस्सा जुड़ा हुआ हो तो उसे अलग करना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि हो सकता है ऐसा करने पर बच्चे का लिंग काम न करे।