447 किमी/सेकेंड की रफ्तार से आकाशगंगा से बाहर जा रही रहस्यमयी वस्तु
- फोटो : NASA
Science News: ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए सालों से वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिकों को कई रहस्यमयी चीजें नजर आती हैं। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा में एक तेज रफ्तार से चलने वाली वस्तु देखी है। यह चीज धुंधली दिखाई दे रही है, लेकिन हर सेकेंड 447 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर रही है। यह वस्तु दिल्ली से भोपाल डेढ़ सेकेंड से भी कम समय में पहुंच जाएगी। यह एक हाइपरवेलोसिटी ऑबजेक्ट है। नासा के सिटिजन साइंटिस्ट ने इसकी खोज की है।
यह वस्तु बेहद तेजी से हमारी आकाशगंगा के बाहर जा रही है। नासा का एक प्रोग्राम है जिसका नाम बैकयार्ड वर्ल्ड्सः प्लैनेट 9 प्रोजेक्ट। इस प्रोजेक्ट के तहत वो लोग जो विज्ञान की दुनिया से जुड़ना चाहते हैं, वो नासा से जुड़ते हैं। अंतरिक्ष में चीजों की खोज करते हैं। बैकयार्ड वर्ल्ड्स में नासा के वाइस मिशन की फोटो का अध्ययन किया जाता है। इस मिशन ने पूरे अंतरिक्ष में साल 2009 से लेकर 2011 तक इंफ्रारेड नक्शा बनाया है। साल 2013 फिर से इस मिशन की नियोवाइस के नाम से शुरुआत की गई। इसे इसी साल 8 अगस्त को रिटायर कर दिया गया।
बैकयार्ड वर्ल्ड्स के सिटिजन साइंटिस्ट मार्टिन काबातनिक, थॉमस पी. बिकल और डैन केसेलडेन ने कुछ साल पहले एक तेजी से घूम रही वस्तु की खोज की। वैज्ञानिकों ने इसका नाम CWISE J124909.08+362116.0. रखा, जिसके बाद धरती पर मौजूद टेलिस्कोप से इसकी जांच शुरू की गई।
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वैज्ञानिक काबातनिक ने बताया कि जब इसकी खोज की गई थी, तो हमारी दिलचस्पी अलग लेवल पर थी। यह हमारी आकाशगंगा को छोड़कर जा रहा है। इसका मास बहुत कम है। इसके कारण इसे किस अंतरिक्षीय वस्तु के तौर पर रखा जाए। यह समझ में नहीं आ रहा था। किसी छोटे तारे के खत्म होने के बाद के मास के बराबर इसका मास है। इसके अलावा इसके कोर में हाइड्रोजन भी नहीं है, जिसकी वजह से इसे ब्राउन ड्वार्फ नहीं कहा जा सकता है। यह गैस जायंट प्लैनेट और तारे के बीच की कोई वस्तु है।
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बैकयार्ड प्रोजेक्ट के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों ने 4000 से अधिक ब्राउन ड्वार्फ खोजे थे, लेकिन कोई आकाशगंगा से बाहर नहीं जा रहा है। इसमें दूसरों तारों की तुलना में लोहा और धातु कम हैं। लगता है कि यह हमारी आकाशगंगा के पहले जेनरेशन के तारों के समय का है। जब हमारी आकाशगंगा का निर्माण हुआ था। इसकी रफ्तार को लेकर दो थ्योरी है। पहली यह है कि किसी सुपरनोवा के फटने के बाद निकला व्हाइट ड्वार्फ है, जो सुपरनोवा से बहुत अधिक पदार्थ लेकर निकल गया या दूसरी थ्योरी यह है कि ग्लोब्यूलर क्लस्टर से निकला है। यह अब किसी ब्लैक होल की तरफ खींचा जा रहा है। इसकी वजह से इसे ज्यादा गति मिल रही है।