औरंगजेब की दो कहानियां
1658 से 1707 तक भारत पर शासन करने वाले औरंगजेब को ‘आलमगीर’ की उपाधि दी गई थी। उनका पूरा नाम अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब था। लेकिन समय के साथ, उनके शासन को अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों से समझा जाने लगा। भारत में वह विवादों और क्रूर शासक के रूप में याद किए जाते हैं, जबकि पाकिस्तान में उनकी इमेज एक न्यायप्रिय और धर्मपरायण शासक की बनाई गई है।
औरंगजेब के बारे में भारत क्या सोचता है?
बता दें कि भारत में औरंगजेब की छवि एक ऐसे शासक की है, जिसने अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए कठोर नीतियों को अपनाया। उनके शासनकाल में कई धार्मिक स्थलों को नष्ट किया गया। यही नहीं, दोबारा से जजिया कर लगाया गया। प्रसिद्ध इतिहासकार जदुनाथ सरकार उन्हें एक कट्टरपंथी शासक मानते हैं, जबकि बाकी विद्वानों का मत है कि उनके फैसले धर्म से अधिक राजनीति से प्रेरित थे।
उनकी नीतियों के कारण फैला असंतोष
यही नहीं, औरंगजेब की क्रूर नीतियों के कारण हिंदू, सिख, जैन और बाकी के समुदायों में असंतोष फैल गया। उनके शासनकाल में कई विद्रोह हुए, जिनमें मराठा, राजपूत और सिखों का प्रतिरोध प्रमुख था। यही कारण है कि भारतीय इतिहास में औरंगजेब को एक विवादित और कठोर शासक के रूप में देखा जाता है।
पाकिस्तान में माना गया आदर्श नेता
वहीं, पाकिस्तान की इतिहास की किताबों में औरंगजेब को एक महान इस्लामी शासक के रूप में दिखाया गया है। वहां उन्हें न्यायप्रिय, धर्मनिष्ठ और इस्लामी कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाला बादशाह बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत में अकबर को ‘महान’ कहा जाता है, वहीं पाकिस्तान में अकबर की धार्मिक नीतियों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, जबकि औरंगजेब को एक सच्चा इस्लामी शासक बताया जाता है।
दो दृष्टिकोणों का टकराव
पाकिस्तान के प्रसिद्ध दार्शनिक और कवि अल्लामा इकबाल ने औरंगजेब को भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम राष्ट्रीयता का संस्थापक बताया। वहीं, मौलाना अबुल अला मौदूदी जैसे इस्लामी विचारकों ने उनकी नीतियों की प्रशंसा करते हुए पाकिस्तान को उनके आदर्शों पर चलने की सलाह दी। औरंगजेब की विरासत भारत और पाकिस्तान में एक पहेली बनी हुई है। एक ही शासक, लेकिन दो बिल्कुल अलग छवियां। भारत में जहां उन्हें कठोर नीतियों वाला बादशाह माना जाता है, वहीं पाकिस्तान में उन्हें एक आदर्श इस्लामी शासक के रूप में देखा जाता है। हालांकि, पाठ्यक्रम से अलग हिंदी सिनेमा और बॉलीवुड फिल्मों में भी औरंगजोब की छवि एक क्रूर शासक के रूप में ही दिखाई गई है।