दरअसल, ओहियो की चेल्सी वॉल्श गर्भवती थीं। उन्होंने अपनी कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की मांग की, लेकिन कंपनी ने उसकी इस मांग को मानने से इंकार कर दिया। कंपनी के इस फैसले की वजह से उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कंपनी करीब 210 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है।
क्या है पूरा मामला?
चेल्सी वॉल्श जटिल और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का सामना कर रही थीं। डॉक्टर ने कहा था कि उनको ज्यादा गतिविधि नहीं करना चाहिए, बेड रेस्ट पर रहना चाहिए और वो घर से ही काम करें। लेकिन कंपनी ने उनकी इस मांग को मानने से इंकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपनी कंपनी से फरवरी 2021 में वर्क फ्रॉम होम की इजाजत मांगी थी, लेकिन कंपनी ने उनकी मांग को खारिज कर दिया।
NASA Artemis II: 54 साल बाद चांद के इतने पास जाएंगे इंसान, 1 अप्रैल को लॉन्च होगा नासा का आर्टेमिस II मिशन
महिला को कंपनी ने दिए थे ये विकल्प
कंपनी ने चेल्सी को दो विकल्प दिए थे। एक ऑफिस आकर काम करें या बिना वेतन की छुट्टी पर चली जाएं। इसका मतलब यह कि अगर छुट्टी लेतीं, तो उनकी आय और हेल्थ कवरेज खत्म हो जाते हैं। इसलिए उन्होंने मजबूरी में जाकर काम करने का फैसला किया है। यह उनके और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक था।
Viral Video: लेट हुई महिला ने जोड़े वंदे भारत के आगे हाथ, फिर जो हुआ देखकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
चेल्सी 22 फरवरी से ऑफिस जाने लगीं और उन्होंने तीन दिन तक डॉक्टर की सलाह के खिलाफ काम किया। 24 फरवरी की शाम को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही घंटों के बाद बच्ची की मौत हो गई।
Video: बॉयफ्रेंड को लेकर भिड़ी पापा की परियां, एक दूसरे के नोचे बाल, इंटरनेट पर वीडियो हुआ वायरल
इसके बाद उन्होंने कपंनी के खिलाफ केस कर दिया। मुकदमे में पता चला कि उनकी बच्ची का दिल धड़क रहा था और वो सांस ले रही थी। लेकिन वो समय से 18 हफ्ते पहले पैदा हो गई थी, जिसकी वजह से उसकी हालत नाजुक थी। जन्म के कुछ ही घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
पूरे मामले में कोर्ट ने कंपनी को जिम्मेदार बताया और वर्क फ्रॉम होम की उचित मांग ठुकराने को दुखद बताया। कंपनी ने चेल्सी को करीब 210.8 करोड़ रुपये देने के लिए कहा है। कोर्ट ने यह फैसला कुछ दिनों पहले सुनाया था। लेकिन यह खबर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोगों के बीच नई बहस छेड़ दी है।