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Zara Hatke: दुनिया का सबसे रहस्यमयी जीव, बिना सांस लिए भी रह सकता है जिंदा, जानिए इसकी खासियत

Thu, 29 Jan 2026 09:19 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Zara Hatke: वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले एक ऐसे रहस्यमयी जीव की खोज की थी, जो बिना सांस लिए जिंदा रह सकता है। इस जीव के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे। 
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दुनिया का सबसे रहस्यमयी जीव - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Zara Hatke: दुनिया में कई ऐसी जीव पाए जाते हैं, जो लोगों के लिए रहस्य होते हैं। साथ ही कुछ जीव होते हैं, जिनके बारे में जानकर लोगों को हैरानी होती है। आज हम आपको एक ऐसे जीव के बारे में बताएंगे, जो बिना सांस लिए भी जिंदा रह सकता है। वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले इस  रहस्यमय जीव (परजीवी) की खोज की थी, जो बिना सांस लिए धरती पर जिंदा है। दुनिया का पहला ऐसा जीव है, जिसके अंदर ये अनोखी विशेषता है।

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यह जीव जेलीफिश की तरह दिखता है और बहुकोशिकीय परजीवी है। इसमें माइट्रोकॉन्ड्रियल जीनोम नहीं है। किसी भी जीव को सांस लेने के लिए माइट्रोकॉन्ड्रियल जीनोम बेहद ही जरूरी होता है। इन्हीं वजहों से इस परजीवी को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती। इस्राइल की तेल-अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने वर्ष 2020 में इस अद्भुत और रहस्यमय परजीवी की खोज की थी।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह परजीवी मछलियों से ऊर्जा प्राप्त करता है। लेकिन इस दौरान वो उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। खास बात ये है कि मछलियां भी इस परजीवी को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। ये परजीवी साल्मन फिश में पाए जाते हैं और ये तब तक जिंदा रहते हैं, जब तक कि मछली जिंदा रहती है।
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दुनिया का सबसे रहस्यमयी जीव - फोटो : Adobe Stock
इस जीव का वैज्ञानिक नाम हेन्नीगुया साल्मिनीकोला है। शोध के प्रमुख, डयाना याहलोमी ने बताया था कि यह जीव इंसानों या दूसरे जीवों के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं है। हालांकि, यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है कि आखिर इस तरह का जीव पृथ्वी पर विकसित कैसे हुआ, जो बिना ऑक्सीजन के भी जिंदा रह सकता है।

शोध के दौरान, वैज्ञानिकों ने इस परजीवी को फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोप से देखा, जिसमें उन्हें माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा। इसके बाद यह स्थिति साफ हो गई कि यह दुनिया का पहला ऐसा जीव है, जिसे जीने के लिए सांस लेना जरूरी नहीं है।

हालांकि, साल 2010 में भी इटली के शोधकर्ताओं को इसी तरह का एक जीव मिला था, जिसमें साफतौर पर माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा था। उसकी ऊर्जा का स्रोत हाइड्रोजन सल्फाइड था। लेकिन नए मिले इस जीव को तो हाइड्रोजन सल्फाइड की भी जरूरत नहीं है।
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