झेलम एक्सप्रेस में हाल ही में एक घटना सामने आई, जिसने यात्रियों को हैरान कर दिया। सोशल मीडिया और रेडिट पर वायरल हुए पोस्ट के मुताबिक ट्रेन के स्लीपर कोच में एक व्यक्ति कथित तौर पर टीटीई बनकर घुस गया और यात्रियों से टिकट चेक करने लगा। इस घटना को देखकर कुछ यात्रियों को शक हुआ और उन्होंने उसकी तस्वीरें क्लिक कर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी पोस्ट के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
भारतीय रेलवे में टिकट चेक करने का काम केवल टीटीई या ट्रेन अटेंडेंट को ही दिया गया है। इसके लिए उन्हें विशेष यूनिफॉर्म पहनना जरूरी होता है और साथ में आई-कार्ड रखना भी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति बिना यूनिफॉर्म या आई-कार्ड के टिकट चेक करता है तो वह नियमों के खिलाफ है। ऐसे में पैसेंजर उसका आईडी कार्ड मांग सकते हैं और शक होने पर रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, फर्जी टीटीई की सूचना ट्रेन के गार्ड या सीनियर अधिकारी को भी दी जा सकती है।
Question about authenticity of this TT
byu/Alexwolfdog inindianrailways
टीटीई बनकर ट्रेन में घुसा शख्स
रेडिट यूजर @Alexwolfdog ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह झेलम एक्सप्रेस के रिजर्व स्लीपर कोच में सफर कर रहा था। तभी एक आदमी खुद को टीटीई बताकर यात्रियों का टिकट काटने लगा। उसने टिकट के दामों को लेकर पैसेंजर्स से मोलभाव करना शुरू कर दिया, जैसे कि किसी बाजार में सौदा चल रहा हो। यूजर ने लिखा कि उसने इस कथित टीटीई से पूछा कि क्या वह सही है या नहीं, क्योंकि वह रेल यात्रा में नया था।
पैसेंजर्स के साथ करता दिखा मोलभाव
पोस्ट में साझा की गई तस्वीरों में कथित टीटीई हाथ में टिकट काटने वाली डायरी लिए नजर आता है। दूसरी तस्वीर में वह स्लीपर कोच में पैसेंजर्स के बीच बैठकर टिकट काटने और मोल भाव करने की कोशिश करता दिखता है। यह देख कर यात्रियों को शक हुआ कि कहीं यह व्यक्ति असली टीटीई तो नहीं है।
पोस्ट पर लोगों ने दी अपनी राय
कमेंट्स सेक्शन में रेडिट यूजर्स ने घटना पर अपनी राय दी। एक यूजर ने पूछा कि क्या उसने सीट भी आवंटित की, या बस टिकट काट कर मोल भाव किया। दूसरे यूजर ने समझाया कि कुछ ट्रेनों में टीटीई का काम थोड़ा अलग होता है। वे विशेष रूप से रिजर्व डिब्बों के यात्रियों को चेक करते हैं क्योंकि नॉर्मल डिब्बे भरे रहते हैं और उनके पास सीट अलॉटमेंट और चार्ट की पूरी जानकारी नहीं होती। उनका उद्देश्य सिर्फ टिकट का सही न होने पर अंतर शुल्क या जुर्माना लेना होता है।