फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर में छिपे हैं कई गहरे राज, अमर होने से जुड़ी है इसके निर्माण की कहानी

Tue, 10 Dec 2019 05:27 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
हिंदू धर्म भारत का सबसे बड़ा और मूल धार्मिक समूह है। यहां की लगभग 80 फीसदी जनसंख्या हिंदू धर्म को मानती है और यही वजह है कि भारत में अनेक हिंदू मंदिर हैं। शायद ही देश का ऐसा कोई भी शहर या गांव होगा, जहां कोई मंदिर न हो। लेकिन इसके बावजूद आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर भारत में नहीं बल्कि कंबोडिया में है।  
विज्ञापन

2 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
इस मंदिर का नाम है अंकोरवाट मंदिर। यह मंदिर कंबोडिया के अंकोर में है, जिसका पुराना नाम 'यशोधरपुर' था। इसका निर्माण 12वीं सदी में खामेर वंश के सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में हुआ था। खास बात ये है कि यह एक विष्णु मंदिर है जबकि यहां के पूर्ववर्ती शासकों ने प्राय: शिव मंदिरों का ही निर्माण कराया था। 
विज्ञापन

3 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
402 एकड़ में फैले इस मंदिर की दीवारों पर भारतीय धर्म ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण है। इन प्रसंगों में अप्सराएं बहुत सुंदर चित्रित की गई हैं। इसके अलावा यहां समुद्र मंथन का दृश्य भी दिखाया गया है। 

4 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
विश्व के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक होने के साथ ही यह मंदिर यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। पर्यटक यहां केवल वास्तुशास्त्र का अनुपम सौंदर्य देखने ही नहीं आते बल्कि यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त देखने भी आते हैं। 
विज्ञापन

5 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
इस मंदिर की खासियत ये है कि इसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में स्थित है, जबकि सभी प्रमुख हिंदू तीर्थों और मंदिरों के द्वार पूर्व दिशा में होते हैं। सूर्यास्त के समय ऐसा लगता है जैसे यह मंदिर सूर्यदेव को नमन कर रहा हो। ढलते सूरज की रोशनी में इस मंदिर की सुंदरता को देखते बनती है।  
विज्ञापन

6 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
कहते हैं कि राजा सूर्यवर्मन हिंदू देवी-देवताओं से नजदीकी बढ़ाकर अमर होना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने लिए एक विशिष्ट पूजा स्थल बनवाया, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की ही पूजा होती थी। आज यही मंदिर अंगकोर वाट के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि स्वयं देवराज इन्द्र ने महल के तौर पर अपने बेटे के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। 
विज्ञापन

7 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
इस मंदिर की रक्षा के लिए एक चतुर्दिक खाई का भी निर्माण कराया गया था, जिसकी चौड़ाई लगभग 700 फुट है। दूर से यह खाई किसी झील की तरह दिखती है। मंदिर के पश्चिम की ओर इस खाई को पार करने के लिए एक पुल बना हुआ है। पुल के पार मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार निर्मित है, जो लगभग 1,000 फुट चौड़ा है। मंदिर की दीवारों पर समस्त रामायण मूर्तियों में अंकित है। 

8 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
इस मंदिर का इतिहास बौद्ध और हिंदू दोनों ही धर्मों से बहुत निकटता से जुड़ा है। यह मंदिर मूल रूप से हिंदू धर्म से जुड़ा पवित्र स्थल है, जिसे बाद में बौद्ध रूप दे दिया गया, लेकिन आज भी हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायी समान रूप से इस मंदिर में आस्था रखते हैं। 
विज्ञापन

9 of 9
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
यह मंदिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है। दरअसल, हिंदू धर्म में मेरु पर्वत को भगवान ब्रह्मा सहित अनेक देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। चूंकि यह मंदिर कंबोडिया की पहचान रहा है, इसलिए इस मंदिर की तस्वीर कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर भी दिखती है।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें