भारत में अब एक ऐसा पुल बन रहा है, जो देश का सबसे लंबा पुल कहलाएगा। इसका नाम है धुबरी-फुलबारी ब्रिज। यह पुल भारत के दो राज्यों असम और मेघालय को आपस में जोड़ेगा। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर बनाया जा रहा है, जो भारत की सबसे बड़ी और शक्तिशाली नदियों में से एक मानी जाती है। पुल बनने के बाद धुबरी यानी असम से फुलबारी यानी मेघालय तक का सफर बेहद आसान और तेज हो जाएगा। तो आज की इस खबर में हम आपको इससे जुड़ी और जानकारी के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
ये है भारत का सबसे लंबा पुल
धुबरी-फुलबारी पुल की कुल लंबाई करीब 19 किलोमीटर होगी। यह भारत का सबसे लंबा नदी पर बना पुल होगा। इससे पहले यह रिकॉर्ड बिहार में बने भूपेन हजारिका पुल के पास था, जिसकी लंबाई लगभग 9.15 किलोमीटर है। लेकिन अब यह नया पुल उसे भी पीछे छोड़ देगा। इस पुल के बनने से लोगों को बहुत राहत मिलेगी। अभी तक इस इलाके के लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए या तो नाव का सहारा लेना पड़ता था या फिर करीब 200 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। इससे बहुत समय और पैसा खर्च होता था। पुल बनने के बाद यह दूरी बहुत कम हो जाएगी और लोग आसानी से कुछ ही समय में यात्रा पूरी कर सकेंगे।
व्यापार के लिए जरूरी रहेगा पुल
यह पुल न सिर्फ आम यात्रियों के लिए मददगार होगा, बल्कि सेना और व्यापार के लिए भी बहुत अहम होगा। यह पुल भारत-चीन और भारत-बांग्लादेश जैसी सीमाओं के नजदीक है। इसलिए सेना की गाड़ियों और जवानों को सीमा तक पहुंचने में बहुत सुविधा मिलेगी। साथ ही इस इलाके में व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि सामान लाने और ले जाने का रास्ता छोटा और आसान हो जाएगा। जब सड़कें और पुल अच्छे होते हैं तो लोगों की आवाजाही भी शुरू हो जाती है। इससे आस-पास के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं और इलाके का आर्थिक विकास हो सकता है।
दो राज्यों के लोगों के सहयोग भी होंगे मजबूत
धुबरी-फुलबारी पुल का काम भी तेजी से चल रहा है और सरकार का लक्ष्य है कि यह पुल साल 2026 तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने की उम्मीद है। इस पुल के निर्माण में जापान सरकार भी तकनीकी सहायता दे रही है। बता दें कि यह पुल सिर्फ एक इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं होगा, बल्कि यह असम और मेघालय के लाखों लोगों की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव लाएगा। पुल बनने के बाद न सिर्फ सफर आसान होगा, बल्कि दो राज्यों के बीच संबंध और सहयोग भी मजबूत होंगे।