कर्स्टी ने मरने वाले लोगों के बारे में कुछ बातें बताई हैं। उनका कहना है कि कई लोग मरने से ठीक पहले एक तरह का आध्यात्मिक बदलाव महसूस करते हैं। इस बदलाव को मेडिकल साइंस के लिए पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, यह एक ठहराव की तरह होता है, जो मरीज के आखिरी पलों में एक अलग तरह का सुकून देता है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कर्स्टी कहती हैं कि कई मरीज अपने आखिरी पलों में करीब एक जैसी बातें कहते हैं। उनका कहना है कि चाहे मरीज की हालत बाहर से ठीक दिखे, वे अक्सर मौत को पहले ही महसूस कर लेते हैं।
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मरने से पहले क्या कहते हैं मरीज?
उन्होंने कहा कि मरने पहले लोग कई बातें कहते हैं। जैसे मेरे परिवार से कह देना कि मैं उनसे प्यार करता/करती हूं। कई बार वे कहते हैं-मुझे ठीक नहीं लग रहा। वहीं कुछ मरीज साफ-साफ कहते हैं-मुझे पता है कि मैं मरने वाला हूं। कोई कहता है कि मुझे लगता है कोई मुझे बुला रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे वाक्य कहने के थोड़ी देर बाद कई मरीजों की मौत हो जाती है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई बार मरीज के सभी टेस्ट और वाइटल्स सामान्य होते हैं। शरीर में कोई बड़ा खतरा नहीं दिखता है, लेकिन अचानक कुछ बदल जाता है, जिसे मशीनें भी नहीं पकड़ पातीं। वे इसे एक तरह का ट्रांजिशन बताती हैं। ऐसे में दवाईयां काम नहीं करती हैं और लगता है कि आत्मा धीरे-धीरे विदाई की तैयारी करने लगती है।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि मौत से पहले दिमाग शरीर को कुछ संकेत देते हैं। इससे बेचैनी या असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन कर्स्टी ने कहा कि उनके अनुभव सिर्फ विज्ञान से आगे जाते हैं। कई अनुभवी नर्सों और देखभाल करने वालों के अनुसार, मौत सिर्फ एक शारीरिक घटना नहीं है, बल्कि एक गहरी भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा भी है।