दुनिया भर में वैज्ञानिक लंबे समय से इंसान की उम्र बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। नई-नई दवाएं, एंटी-एजिंग तकनीक और आधुनिक चिकित्सा ने जीवन को पहले से लंबा जरूर बनाया है, लेकिन क्या कोई इंसान कभी 200 साल तक जीवित रह सकता है? रूस के वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च इस सवाल का जवाब नहीं की ओर इशारा करती है। तो आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने क्या बताया है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
स्कोलकोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक गणितीय मॉडल तैयार किया है, जिसमें इंसानी उम्र की ज्यादा सीमा का अनुमान लगाया गया। अध्ययन की मानें तो अगर भविष्य में कैंसर, हृदय रोग और दूसरी जानलेवा बीमारियों का पूरी तरह इलाज भी मिल जाए तब भी इंसान की उम्र लगभग 156 साल के आसपास ही रह सकती है। बेहद अलग परिस्थितियों में कोई व्यक्ति 194 साल तक जीवित रह सकता है, लेकिन इसके आगे जाना फिलहाल संभव नहीं माना जा रहा।
आखिर क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह?
वैज्ञानिकों की मानें तो इसकी सबसे अहम वजह शरीर में समय के साथ होने वाले सोमेटिक म्यूटेशन हैं। ये डीएनए में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव होते हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ लगातार जमा होते रहते हैं। धीरे-धीरे इनका असर शरीर के जरूरी अंगों के काम करने की क्षमता पर पड़ने लगता है।
दिमाग और दिल के सेल क्यों बनते हैं सबसे बड़ी चुनौती?
हमारे शरीर के कई हिस्सों, जैसे त्वचा और लिवर के सेल, समय-समय पर नए बनते रहते हैं। इससे वे काफी हद तक खुद की मरम्मत कर लेते हैं। लेकिन दिमाग के न्यूरॉन्स और दिल की मांसपेशियों के सेल एक बार बनने के बाद दोबारा विभाजित नहीं होते। यही कारण है कि इनमें होने वाला नुकसान समय के साथ बढ़ता जाता है।
आगे किस दिशा में होगी रिसर्च?
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्टडी एंटी-एजिंग रिसर्च के लिए नई दिशा दिखा सकता है। उनका कहना है कि केवल बीमारियों का इलाज खोज लेना काफी नहीं होगा। भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती दिमाग और दिल के उन सेल्स को लंबे समय तक हेल्दी बनाए रखना होगी, जो खुद को दोबारा नहीं बना सकते। वैज्ञानिक आगे इस मॉडल में माइटोकॉन्ड्रिया की खराबी और टेलोमेयर के छोटे होने जैसे कारणों को भी शामिल कर इंसानी उम्र की सीमा को और बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करेंगे। तो ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कोई भी इंसान 200 साल के पार नहीं जीवित रह सकता है।