एक अनुमान के मुताबिक, 15,000 साल पहले वर्तमान समय के कुत्तों के पूर्वज रहे भेड़ियों ने जंगली जानवर से पालतू साथी बने थे। कुछ भेड़िये अभी भी जंगली हैं। इंसानों ने जैसे-जैसे उनके साथ रहना सीखा ये जानवर समाज और पारिवारिक जीवन में बेहद अहम निभाने लगे। कुत्ते शिकार, पहरेदारी और साथी के रूप में लोगों के साथ रहने लगे। इस दौरान लोगों ने मृत परिजन की तरह दफनाने। वैज्ञानिकों ने प्राचीन कुत्तों के अवशेषों की जांच की, जिसके बाद इंसान-कुत्ते के संबंधों की और भी जानकारियां मिलीं।
भारत और मिस्र से लेकर इराक तक दुनिया की लगभग हर सभ्यताओं में इंसान के कुत्ते नजर आए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 8,000 साल पहले कई लोगों ने खानाबदोश जीवन को त्याग दिया, जिके बाद वह बसने और खेती करने का रास्ता अपना लिए। इससे पशुओं की देखभाल और सुरक्षा करने वाले कुत्ते इंसानों के दैनिक जीवन में और भी जरूरी हो गए। कुत्तों के विकास में भी बदलाव हो रहा था।
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4,000 से 8,000 साल पहले के कुत्तों के डीएनए नमूने से पता चला है कि वे इंसानों के साथ-साथ अनुकूलन कर रहे थे। लेकिन, उनके भेड़िये पूर्वज मांसाहारी थे और कुत्तों में स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों को पचाने की क्षमता का विकास हो गया था, जो इंसानों के आहार में आम था। वैज्ञानिकों के बीत इस बात पर अभी बहस होती है कि इसकी पहल सबसे पहले किसने की? क्या कुत्तों ने इंसानों से दोस्ती करने का निर्णय लिया या इंसानों? वैज्ञानिकों को यह पता है कि यह आपसी भावना थी और तभी दोनों में दोस्ती बन गई।
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इंसान और कुत्ते का संबंध कुत्ते के पालतूकरण में निहित है, जिसकी 30,000-40,000 साल पहले शिकारी-संग्रहकर्ताओं के साथ उनके दीर्घकालिक जुड़ाव के माध्यम से शुरुआत हुई थी। इंसानों और कुत्तों के बीच सबसे पहले ज्ञात संबंध का प्रमाण 1914 में बॉन-ओबरकेसेल कुत्ते की खोज से मिलता है। इससे करीब 15,000 साल पहले आधुनिक जर्मनी के ओबरकेसेल में दो इंसानों के साथ दफनाया गया था।
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कुत्तों और मनुष्यों की दोस्ती दुनिया भर की प्राचीन कला में नजर आती है। अभिलेखों के मुताबिक, प्राचीन ग्रीस में कुत्तों को अक्सर उनकी चिकित्सीय क्षमताओं की वजह से चिकित्सा मंदिरों में रखा जाता था। प्राचीन ग्रीक समाज के इन अहम सदस्यों को मूर्तियों और चित्रित मिट्टी के बर्तनों में दर्शाया गया था। मिस्र के भित्तिचित्रों में फिरौन को पालतू जानवरों के साथ प्रदर्शित किया गया है, तो वहीं मूर्तियां, खिलौने, कलाकृतियां और यहां तक कि कुत्तों की ममियों से भी पता चलता है कि 6000 ईसा पूर्व तक पालतू जानवरों के माता-पिता के लिए कुत्ते कितने महत्वपूर्ण थे।