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दुनिया की सबसे गर्म जगह, जहां छिपे हैं कई गहरे राज

Mon, 30 Dec 2019 10:56 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
चलिए, आज आपको दुनिया की सबसे गर्म जगह का किस्सा सुनाते हैं। इस जगह का नाम है, 'डानाकिल डिप्रेशन'। ये जगह उत्तरी अफ्रीकी देश इथियोपिया में है। इसका एक हिस्सा पड़ोसी देश इरीट्रिया से भी मिलता है। 'डानाकिल डिप्रेशन' दुनिया की सबसे गर्म, सबसे सूखी, और धरती पर सबसे नीची जगह है। ये इथियोपिया के अफार इलाके में पड़ती है। यहां का मौसम बेहद जालिम है। फिर भी आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि बेहद खराब माहौल होने के बावजूद यहां बहुत से लोग रहते हैं। इथियोपिया के अफार समुदाय के लोग बेरहम मौसम वाले ठिकाने को अपना घर मानते हैं। 
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
'डानाकिल डिप्रेशन' को दुनिया की सबसे गर्म जगह इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां साल भर औसत तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है। धरती पर जो और गर्म जगहें हैं, वहां औसतन इतना तापमान नहीं रहता। कभी-कभी बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। मगर 'डानाकिल डिप्रेशन' में औसत तापमान ही 35 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहता है। इसके सिवा यहां बारिश भी बेहद कम होती है। साल भर में केवल 100 से 200 मिलीमीटर बारिश यहां होती है। इसके अलावा एक खास बात और भी है कि 'डानाकिल डिप्रेशन' समुद्र तल से करीब सवा सौ मीटर नीचे है। यहां के ये हालात इसे रहने के लिए धरती पर सबसे बदतर ठिकाना बना देते हैं। 
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
'डानाकिल डिप्रेशन' में सिर्फ धरती के ऊपर का माहौल नहीं खराब है। यहां धरती के अंदर भी हलचल मची हुई है। ये वो जगह है जहां पर तीन टेक्टॉनिक प्लेट्स मिलती हैं। ये वो प्लेट हैं, जिन पर हमारे महाद्वीप और महासागर हैं। 'डानाकिल डिप्रेशन' में जो तीन टेक्टॉनिक प्लेटें हैं वो सालाना एक से दो सेंटीमीटर की दर से एक दूसरे से दूर हो रही हैं। धरती के भीतर मची-इस उथल-पुथल का नतीजा ये कि धरती के भीतर की आग अक्सर यहां बाहर निकल आती है। पिघलता लावा यहां बड़े इलाके में फैला हुआ है। पूरे इलाके में कई ज्वालामुखी हैं जो आग और राख उगलते रहते हैं। 

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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
जब 'डानाकिल डिप्रेशन' पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप धरती पर नहीं, किसी और ग्रह पर पहुंच गए हैं। यहां का मौसम बेहद गर्म और रूखा है। यहां वहां गड़्ढों में पिघलता लावा दिखेगा। आस-पास के इलाकों में लावे के ठंडे होने से बनी चट्टानें और पहाड़ियां दिखेंगी। चूंकि यहां अंदर धरती में आग लगी हुई है, इसलिए 'डानाकिल डिप्रेशन' में गर्म पानी के कई सोते हैं, झरने हैं। पानी बाहर आते ही भयंकर गर्मी में सूख जाता है। इसलिए इस इलाके में नमक की कई खदानें भी हैं। 
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
जिस रफ्तार से 'डानाकिल डिप्रेशन' के नीचे धरती खिसक रही है, उससे लाखों साल बाद यहां गहरा गड्ढा हो जाएगा। यहां पर लाल सागर का पानी भर जाएगा। इसलिए 'डानाकिल डिप्रेशन' लाखों साल बाद एक नए समंदर की शुरुआत का ठिकाना होगा। समंदर की शुरुआत तो लाखों साल बाद होगी लेकिन लाखों साल पहले इसी जगह से इंसान का विकास शुरू हुआ था। 1974 में वैज्ञानिक डोनाल्ड जॉनसन और उनकी टीम ने यहीं पर लूसी नाम का कंकाल खोज निकाला था। वो ऑस्ट्रेलोपिथेकस नस्ल की थी जो इंसान के सबसे पुराने रिश्तेदार माने जाते हैं। आज के मानव से पहले के कई नस्लों के कंकाल यहां से मिले हैं। इसीलिए वैज्ञानिक इसे इंसान के विकास का पहला ठिकाना मानते हैं। 
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
'डानाकिल डिप्रेशन' में छोटे छोटे कई कीटाणु मिलते हैं, जिन्हें एक्सट्रीमोफाइल कहा जाता है। इसका मतलब है कि ये बेहद मुश्किल हालात में रहने वाले बैक्टीरिया हैं। 'डानाकिल डिप्रेशन' में मिलने वाले जीवों से वैज्ञानिकों को ये सुराग मिलने की उम्मीद है कि धरती पर जिंदगी की शुरुआत कैसे हुई थी या फिर दूसरे ग्रहों पर जीवन की कितनी संभावना है। 
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
'डानाकिल डिप्रेशन' तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल है। यहां का सफर इथियोपिया के मेकेले शहर से शुरू होता है। रास्ते में आपको ऊबड़-खाबड़ सड़कों, धूल भरे रास्तों और रेगिस्तानी इलाके से गुजरना होता है। यहां का माहौल देखकर आपको लगेगा कि भला इतनी बेरहम जगह पर कौन रहेगा। मगर, यहां अफार समुदाय के लोग रहते हैं। आप यहां जलते हुए सूरज में तप जाएंगे। मगर अफार समुदाय के लोगों को इस गर्म, रूखे माहौल में रहने की आदत हो गई है। उन्हें यहां के माहौल में रहने की ऐसी आदत हो गई है कि भूख-प्यास भी नहीं लगती। 

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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
यहां के लोगों के लिए नमक बेहद कीमती चीज है। वो नमक की चट्टानें काट-काटकर उसे ले जाकर बेचते हैं। मेकेले शहर सबसे पास का बाजार है। ऊंटों और गधों की मदद से नमक को इस शहर के बाजार तक पहुंचाया जाता है। इस दूरी को अफार लोग करीब हफ्ते भर में तय करते हैं। इस दौरान उनके पास गिनी चुनी रोटियां और पानी होता है। अफार समुदाय के लोग घुमंतू होते हैं। वो बुनियादी किस्म की जिंदगी बसर करते हैं। यहां बहने वाली छोटी सी अवाश नदी यहां के लोगों की लाइफलाइन है। इसके पानी पर ही स्थानीय लोग और उनके पालतू जानवर बसर करते हैं।  
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डानाकिल डिप्रेशन - फोटो : Social media
अवाश नदी भी दुनिया की अजब-गजब नदी है। ये कभी भी समंदर तक का सफर नहीं करती। 'डानाकिल डिप्रेशन' से गुजरते वक्त यहां की भयंकर गर्मी की वजह से अवाश नदी सूख जाती है। फिर इसकी तलहटी में नमक जम जाता है। 'डानाकिल डिप्रेशन' खुद में खराब जगह है। मगर अवाश नदी यहां के सूखे, बंजर इलाके में जीवनधारा की तरह बहती है। इसका पानी पीने के काम आता है। फिर नदी में जमा नमक, यहां के लोगों की रोजी का जरिया बन जाता है। 'डानाकिल डिप्रेशन' को देखकर लगता है कि हम चांद पर आ गए हैं। मगर जालिम माहौल वाला ये इलाका मानवता की शुरुआत का केंद्र है। यहां से हमें कई और राज भी मिल सकते हैं। 
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