अल-नीनो एक प्राकृतिक घटना है, जो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने पर बनता है। हर दो से सात साल में आता है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। इस साल अल-नीनो की वजह से भारत में गर्मी बढ़ गई है। अल नीनो से तापमान बढ़ता है और साथ ही हवा में नमी भी बढ़ जाती है। दिल्ली जैसे शहरों में नमी 60-70 प्रतिशत तक पहुंचने पर गर्मी और भी तेज हो जाती है। सामान्य 42 डिग्री तापमान अचानक 51 डिग्री जैसा महसूस हो रहा है।
क्या है असली खतरा?
वेट बल्ब टेम्परेचर असली खतरा है। यह एक माप होता है, जिससे पता चलता है कि शरीर कितनी गर्मी सह सकता है। ह्यूमिडिटी अधिक होने पर पसीना सूखता नहीं है। इसके कारण शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं होता। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि अगर वेट बल्ब टेम्परेचर 35 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है, तो इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दिल्ली में वर्तमान स्थिति में नमी की वजह से यही हो रहा है। 42 डिग्री का तापमान 51 डिग्री महसूस हो रहा है।
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क्यों बढ़ रही है दिल्ली में गर्मी?
दिल्ली में सिर्फ धूप के कारण गर्मी नहीं बढ़ रही है। इसके कई कारण हैं, जिनमें प्रदूषण, कंक्रीट जंगल और नमी का मिला-जुला प्रभाव शामिल है। लोगों को दिन में पसीना आ रहा है और थकान हो रही है। लोग सिर दर्द और चक्कर की समस्या से जूझ रहे हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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क्या अल नीनो के कारण पड़ रही गर्मी?
अल-नीनो की वजह से सिर्फ गर्मी नहीं पड़ रही है, बल्कि कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर जैसे उत्तरी इलाकों में गर्मी और नमी मुख्य समस्या है। वैज्ञानिक का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से अल-नीनो का प्रभाव और तेज हो गया है। इस तरह की घटनाएं पहले से ज्यादा खतरनाक हो रही हैं। गर्मी सिर्फ इस साल की समस्या नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में स्थिति और भी खराब हो सकती है। अल-नीनो यह याद दिला रहा है कि प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा इंसान को भुगतना पड़ रहा है।