डॉ. मोलिना उन शोधकर्ताओं में शामिल थे जिन्होंने यह बताया था कि किस तरह से केमिकल धरती के ओजोन कवच को नष्ट कर देते हैं। हानिकारक अल्ट्रावायलेट लाइट से इंसानों, पौधों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए जरूरी ओजोन परत बेहद जरूरी है।
ओजोन परत में छेद की खोज और इससे होने वाले नुकसान का पता लगाने में डॉ मारियो मोलिना ने अहम भूमिका निभाई थी। उनको इस कार्य के लिए 1995 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. मोलिना उन लोगों में से एक थे जिन्होंने धरती पर क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) के प्रभावों का पता लगाया था।
जानिए डॉ मारियो मोलिना के बारे में
डॉ मारियो मोलिना का पूरा नाम मारियो जोस मोलिना हेनरिकेज है।
डॉ मारियो मोलिना मेक्सिको के एक रसायन वैज्ञानिक थे। उन्होंने धरती पर पड़ने वाले ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को लेकर कई बातों का पता लगाया था। इन खोज में ओजोन परत में छेद भी शामिल है जो क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैसों का प्रभाव है।
डॉ मोलिना उन शोधकर्ताओं में शामिल हैं जिन्होंने यह पता लगाया कि ओजोन परत में कैसे छेद हुआ। उन्होंने यह भी खोज किया कि इसकी वजह क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस है। इस गौस का इस्तेमाल एयर कंडीशनर, एयरोसोल स्प्रे और रेफ्रिजरेटर आदि में इस्तेमाल किया जाता है।
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इस शोध से ग्लोबल वार्मिंग के खतरे का पता लगा जिसकी वजह से मॉन्ट्रियल संधि हुई। इस अंतरराष्ट्रीय संधि के कारण करीब 100 ओजोन-क्षयकारी रसायनों के उत्पादन पर सफलतापूर्वक बैन लगाया गया।
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बाथरूम को बना लिया था प्रयोगशाला
19 मार्च, 1943 को मेक्सिको सिटी में डॉ. मोलिना का जन्म हुआ था। उनके अंदर बचपन से ही विज्ञान को लेकर जुनून था। उन्होंने अपने एक बाथरूम को अस्थायी प्रयोगशाला बना दिया था। डॉ. मोलिना ने मेक्सिको के नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जर्मनी के फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय से एडवांस्ड डिग्री प्राप्त की।
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पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. मोलिना कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले और इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पोस्टडॉक्टोरल शोध के लिए अमेरिका चले गए। 1970 के दशक की शुरुआत में उन्होंने सिंथेटिक रसायन धरती के वायुमंडल को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, इस पर शोध करना शुरू किया। उनका और उनके शोधकर्ता साथियों का निष्कर्ष नेचर जर्नल में प्रकाशित किया गया। इसके बाद उन्हें रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला। 07 अक्टूबर, 2020 को 77 साल की उम्र में उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।