ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद वायुमंडल में 14 किमी तक राख फैल गई। हेयली गुब्बी ज्वालामुखी के विस्फोट से निकली राख वायुमंडल में इतनी तेजी से फैली कि यमन और ओमान होते हुए यह भारत पहुंच गई और अब चीन की तरफ बढ़ने लगी है।
कैसा है इलाका?
इथियोपिया के अफार इलाके को भूकंप-प्रवण क्षेत्र माना जाता है। जहां पर ज्वालामुखी फटा, वो रेगिस्तानी इलाका है और इससे आसपास छोटे-छोटे गांव हैं। इसके कारण आसपास बसे गांव राख से ढंक गए और जान-माल का नुकसान कम हुआ। आसपास के गांवों में रहने वाले लोग पशुपालन करके अपनी जीविका चलाते हैं।
कैसे हैं हालात?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफार क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सईद ने जानकारी दी कि ज्वालामुखी विस्फोट से कोई हताहत नहीं हुआ। हालांकि, इसके कारण आस-पास के दर्जनों गांव राख से ढक गए हैं। किसी व्यक्ति या मवेशी की जान नहीं गई है।
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विस्फोट के बाद हिली धरती
स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें एक जोरदार विस्फोट की आवाज सुनाई दी। लोगों ने कहा कि ऐसा लगा जैसे कि किसी ने बम फेका हो, जिससे धुआं और राख फैल गई हो। उन्होंने एक तेज कंपन महसूस किया। उनका कहना है कि अचानक से धरती हिल गई थी।
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क्या पहले भी कभी फटा है ये ज्वालामुखी?
स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के वैश्विक ज्वालामुखी कार्यक्रम ने बताया कि होलोसीन (करीब 12,000 साल पहले शुरू हुआ भूवैज्ञानिक काल) के दौरान ज्वालामुखी हेली गुब्बी के फटने का कोई ज्ञात रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के ज्वालामुखी विज्ञानी साइमन कार्न का कहना है कि ज्वालामुखी का होलोसीन विस्फोटों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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भारत तक पहुंचा ज्वालामुखी का धुआं और चीन की तरफ बढ़ा
ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र और भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को पाकिस्तान और उत्तरी भारत में राख के धुएं फैलने से पहले यमन और ओमान के ऊपर से घने धुएं का गुबार दिखा था। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, इथियोपिया में ज्वालामुखी विस्फोटे से निकले राख के बादल भारत से दूर जा रहे हैं। ये बादल अब चीन की तरफ बढ़ रहे हैं और मंगलवार शाम 7.30 बजे तक पूरी तरह भारतीय आसमान से निकल जाएंगे। मौसम विभाग स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और फिलहाल चिंता की जरूरत नहीं है।