आज जब डॉक्टर शैलजा वल्लभनेनी उस दिन के बारे में सोचती हैं तो वो यकीन नहीं कर पातीं। उन्होंने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए जमीन से हजारों फीट ऊपर उड़ते विमान में बच्चे की डिलीवरी करवाई है। डिलीवरी करवाने के लिए उन्हें उस वक्त विमान में केवल कैंची, सैनिटाइजर, पट्टी ही मिल पाई थी। शायद ये भारत का पहला बच्चा है, जिसने अपनी आंखें आसमान में खोली हैं।
हालांकि, इस काम के लिए विमान में मौजूद सभी यात्रियों से उन्हें भरपूर सहयोग मिला जो डिलीवरी के बाद महिला और बच्चे को आराम देने के लिए लगातार तौलियों, शॉल, पैड्स, डायपर और बैग्स की सप्लाई कर रहे थे। इस दौरान उन्हें विमान में सवार एक प्लास्टिक सर्जन से भी प्रोफेशनल मदद मिली।