पेनमुंडे गांव
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ये फैक्ट्री करीब 25 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली थी। पेनमुंडे में होने वाला रिसर्च और मिसाइल टेस्ट, दुनिया के सबसे बड़े युद्ध के लिए ही अहम नहीं थे, बल्कि आने वाले वक्त के लिए भी बेहद अहम साबित हुए। इस गांव में ही रॉकेट तकनीक की बुनियाद रखी गई जिसकी मदद से आगे चलकर इंसान ने अंतरिक्ष का सफर शुरू किया। आज पेनमुंडे गांव एक उजाड़ जगह है। इमारत के नाम पर लाल रंग का एक पॉवर स्टेशन बचा है जिसमें पेनमुंडे हिस्टोरिकल टेक्निकल म्यूजियम स्थापित किया गया है। पूरे इलाके में रॉकेट के टुकड़े, पतवार, इंजन और दूसरे यंत्र बिखरे हुए हैं। इन्हें देखकर खौफ का अहसास होता है।