सेमीपलाटिंस्क टेस्ट साइट
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जब परमाणु परीक्षण के लिए 1947 में इस जगह को चुना गया तब यहां 70,000 लोग रहते थे। इनमें कारिप्बेक कुयूकोव भी हैं जो सोवियत रूस के परीक्षणों का नतीजा सह रहे हैं। उन्होंने बताया, 'जब मैं पैदा हुआ मेरे हाथ नहीं थे। मेरी मां सदमे में थी, उनके लिए ये मुश्किल समय था। वो तीन दिन तक मुझे देख तक नहीं पाईं।' कुयूकोव खानाबदोश गड़रियों के परिवार में 1968 में पैदा हुए थे, जिन्हें एक परमाणु बम के परीक्षण से ठीक पहले इलाके से बाहर निकाला गया था। वो कहते हैं, 'डॉक्टर में मेरी मां को बताया था कि अगर वो मुझे नहीं चाहतीं तो वो मुझे ऐसा इंजेक्शन दे सकते हैं जिससे मेरी और उनकी तकलीफ खत्म हो जाएगी। वो कहते हैं कि उनके पिता ने इससे इंकार कर दिया था। कुयूकोव बताते हैं, 'उन्होंने मुझे जिंदगी का तोहफा दिया, मुझे लगता है कि परमाणु परीक्षण का दर्द झेलने वाला दुनिया का आखिरी इंसान बनना मेरा मिशन है।'