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आखिर ग्रहण लगते ही जानवर क्यों करने लगते हैं अजीब हरकतें? हैरान हो जाएंगे जानकर

Sun, 21 Jun 2020 10:52 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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solar eclipse 2020 - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण को अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है, जिसका नकरात्मक प्रभाव इंसानों पर पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ग्रहण का प्रभाव सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है। इसीलिए तो ग्रहण के दौरान पशु-पक्षी अजीब हरकतें करने लगते हैं। इसमें सूर्य ग्रहण से लेकर चंद्र ग्रहण तक शामिल है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रहण के दौरान मकड़ियों की कुछ प्रजातियों के व्यवहार में अचानक बेचैनी सी हो जाती है और वो अपने ही जाले को तोड़ने लगती हैं और जब ग्रहण खत्म हो जाता है तो वो उसे फिर से बनाना शुरू करती हैं। कुछ ऐसा ही बदलाव पक्षियों में भी हो जाता है। जहां आमतौर पर वो दिनभर इधर से उधर उड़ते फिरते हैं, लेकिन ग्रहण के दौरान वो अचानक अपने घर की ओर लौट जाते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रहण के दौरान चमगादड़ों में भी बदलाव आता है। ग्रहण के दौरान उन्हें भ्रम हो जाता है कि रात हो गई है और वो उड़ना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा सुपर मून के दौरान जब चांद ज्यादा चमकदार होता है तो बत्तखों के व्यवहार में भी बदलाव दिखने लगता है। वैज्ञानिकों ने जंगली बर्फीली बत्तख गीज पर एक शोध किया था और उस दौरान उन्होंने उसके शरीर में एक छोटी सी डिवाइस फिट कर दी तो पाया कि सुपर मून के दौरान बत्तख के दिल की धड़कन बढ़ जाती है। साथ ही उनके शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। हालांकि ग्रहण खत्म होने पर वो अपने आप फिर से ठीक हो जाते हैं। 

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नाइट मंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
साल 2010 में हुए एक शोध के मुताबिक, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों में पाई जाने वाली बंदरों की एक प्रजाति, जिसे 'नाइट मंकी' (रात का बंदर) कहा जाता है, चंद्र ग्रहण होते ही डर जाते हैं। जहां आमतौर पर वो पेड़ों पर उछल-कूद मचाते हैं, लेकिन ग्रहण के दौरान उन्हें पेड़ों पर चलने में भी डर लगता है। 
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दरियाई घोड़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
आमतौर पर हिप्पोपोटामस, जिसे दरियाई घोड़ा भी कहते हैं, पानी में ही रहते हैं, लेकिन सूर्य ग्रहण के दौरान वो बेचैन होकर सूखे जगहों की ओर चल पड़ते हैं। एक ग्रहण के दौरान जिम्बाब्वे में कुछ ऐसा ही देखा गया था। हालांकि आधे रास्ते में अगर ग्रहण खत्म हो जाता है और रोशनी वापस आ जाती है तो वो वापस लौट आते हैं।  
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